CBSE कक्षा 10 विज्ञान (रसायन विज्ञान)
अध्याय 4 – कार्बन एवं उसके यौगिक
20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
यह अध्याय सहसंयोजक बंध, कार्बन की चतुसंयोजकता, श्रृंखलन, समजातीय श्रेणी, एथेनॉल, एथेनॉइक अम्ल, साबुन एवं अपमार्जक आदि विषयों पर आधारित है।
1. कार्बन आयनिक बंध बनाने के बजाय सहसंयोजक बंध क्यों बनाता है?
उत्तर:
कार्बन की परमाणु संख्या 6 होती है तथा इसकी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,4 है। इसके बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। यदि कार्बन 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करे तो C⁴⁻ आयन बनेगा, जो अत्यधिक अस्थिर होगा। इसी प्रकार 4 इलेक्ट्रॉन त्यागकर C⁴⁺ आयन बनाना भी बहुत अधिक ऊर्जा की मांग करता है। इसलिए कार्बन न तो आसानी से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है और न ही त्यागता है। इसके स्थान पर वह अन्य परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉनों का साझाकरण करता है और सहसंयोजक बंध बनाता है। इसी गुण के कारण कार्बन अनेक प्रकार के यौगिकों का निर्माण करता है।
2. कार्बन की चतुसंयोजकता (Tetravalency) क्या है?
उत्तर:
कार्बन के बाह्यतम कोश में चार इलेक्ट्रॉन होते हैं। अष्टक पूरा करने के लिए इसे चार और इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। इसलिए कार्बन चार सहसंयोजक बंध बनाने की क्षमता रखता है। इसी गुण को चतुसंयोजकता कहते हैं। उदाहरण के लिए मीथेन (CH₄) में कार्बन चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ चार सहसंयोजक बंध बनाता है। कार्बन की यह विशेषता उसे विभिन्न प्रकार के सरल एवं जटिल यौगिक बनाने में सक्षम बनाती है। जीवित प्राणियों के शरीर में पाए जाने वाले अधिकांश कार्बनिक यौगिक इसी गुण के कारण अस्तित्व में हैं।
3. श्रृंखलन (Catenation) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
कार्बन परमाणुओं की अपने ही समान परमाणुओं के साथ मजबूत सहसंयोजक बंध बनाकर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखित श्रृंखलाएँ तथा वलय (रिंग) बनाने की क्षमता को श्रृंखलन कहते हैं। कार्बन-कार्बन बंध अत्यंत मजबूत होते हैं, इसलिए कार्बन हजारों प्रकार के यौगिक बना सकता है। उदाहरण के लिए एथेन, प्रोपेन तथा बेंजीन जैसे यौगिक श्रृंखलन के कारण बनते हैं। यही गुण कार्बन को अन्य तत्वों से अलग बनाता है तथा कार्बनिक रसायन विज्ञान का आधार प्रदान करता है। पेट्रोलियम, प्लास्टिक तथा जैविक अणुओं का निर्माण भी इसी गुण के कारण संभव है।
4. संतृप्त एवं असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों में अंतर लिखिए।
उत्तर:
संतृप्त हाइड्रोकार्बनों में कार्बन-कार्बन के बीच केवल एकल बंध पाए जाते हैं। इन्हें एल्केन कहा जाता है, जैसे मीथेन और एथेन। दूसरी ओर, असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों में दोहरे या तिहरे बंध उपस्थित होते हैं। इन्हें क्रमशः एल्कीन और एल्काइन कहा जाता है, जैसे एथीन और एथाइन। संतृप्त यौगिक अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील होते हैं, जबकि असंतृप्त यौगिक योगात्मक अभिक्रियाएँ आसानी से करते हैं। वनस्पति तेलों में असंतृप्त यौगिक पाए जाते हैं जिन्हें हाइड्रोजनीकरण द्वारा संतृप्त वसा में बदला जा सकता है।
5. समजातीय श्रेणी क्या है?
उत्तर:
ऐसे कार्बनिक यौगिकों की श्रेणी जिनका कार्यात्मक समूह समान हो तथा क्रमागत सदस्यों में –CH₂– का अंतर हो, समजातीय श्रेणी कहलाती है। उदाहरण के लिए एल्केन श्रेणी में मीथेन (CH₄), एथेन (C₂H₆), प्रोपेन (C₃H₈) आदि आते हैं। इन यौगिकों के रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं, जबकि उनके भौतिक गुण क्रमशः बदलते रहते हैं। समजातीय श्रेणी के अध्ययन से कार्बनिक यौगिकों का वर्गीकरण सरल हो जाता है और उनके गुणों का अनुमान लगाना आसान हो जाता है।
6. कार्यात्मक समूह (Functional Group) क्या होता है?
उत्तर:
कार्बनिक यौगिक में उपस्थित वह परमाणु या परमाणुओं का समूह जो उस यौगिक के विशिष्ट रासायनिक गुणों को निर्धारित करता है, कार्यात्मक समूह कहलाता है। उदाहरण के लिए –OH समूह एल्कोहॉल, –COOH समूह कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा –CHO समूह एल्डिहाइड को दर्शाता है। कार्यात्मक समूह के कारण समान कार्बन श्रृंखला वाले यौगिकों के गुण भिन्न हो सकते हैं। कार्बनिक यौगिकों के नामकरण तथा वर्गीकरण में कार्यात्मक समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
7. सहसंयोजक यौगिकों के तीन गुण लिखिए।
उत्तर:
सहसंयोजक यौगिक इलेक्ट्रॉनों के साझाकरण द्वारा बनते हैं। इनके प्रमुख गुण हैं— (i) इनका गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः कम होता है क्योंकि इनके अणुओं के बीच आकर्षण बल कमजोर होते हैं। (ii) ये जल में प्रायः अघुलनशील तथा कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं। (iii) ये विद्युत के कुचालक होते हैं क्योंकि इनमें मुक्त आयन नहीं होते। उदाहरण के रूप में मीथेन, एथेन तथा कार्बन डाइऑक्साइड सहसंयोजक यौगिक हैं।
8. एथेनॉल के कोई तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर:
एथेनॉल (C₂H₅OH) एक महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिक है। इसका उपयोग औद्योगिक विलायक के रूप में किया जाता है क्योंकि यह अनेक पदार्थों को घोल सकता है। इसका उपयोग दवाइयों, इत्रों तथा सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त एथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिलाकर ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है, जिससे प्रदूषण कम होता है। प्रयोगशालाओं में भी इसे संरक्षक पदार्थ तथा रासायनिक अभिक्रियाओं में विलायक के रूप में उपयोग किया जाता है।
9. एथेनॉइक अम्ल के गुण लिखिए।
उत्तर:
एथेनॉइक अम्ल (CH₃COOH) को सामान्यतः सिरका या एसिटिक अम्ल कहा जाता है। इसका स्वाद खट्टा होता है तथा इसमें अम्लीय गुण पाए जाते हैं। यह नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है। शुद्ध एथेनॉइक अम्ल 16.6°C पर जम जाता है, इसलिए इसे हिमानी एसिटिक अम्ल कहा जाता है। यह क्षारों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाता है तथा एस्टरीकरण अभिक्रिया में भाग लेकर एस्टर बनाता है। इसका उपयोग खाद्य पदार्थों के संरक्षण और रसायनों के निर्माण में किया जाता है।
10. एस्टरीकरण अभिक्रिया क्या है?
उत्तर:
जब कोई कार्बोक्सिलिक अम्ल किसी एल्कोहॉल के साथ सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में अभिक्रिया करता है और सुगंधित एस्टर बनाता है, तो इसे एस्टरीकरण अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरण के लिए एथेनॉइक अम्ल और एथेनॉल की अभिक्रिया से एथाइल एथेनोएट बनता है। एस्टरों में सुखद गंध होती है, इसलिए उनका उपयोग इत्र, खाद्य सुगंध तथा सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है। यह कार्बनिक रसायन की महत्वपूर्ण अभिक्रियाओं में से एक है।
11. साबुन कैसे बनता है?
उत्तर:
साबुन का निर्माण सैपोनिफिकेशन प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। इस प्रक्रिया में वनस्पति तेलों या वसा की अभिक्रिया सोडियम हाइड्रॉक्साइड अथवा पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ कराई जाती है। परिणामस्वरूप साबुन और ग्लिसरॉल प्राप्त होते हैं। साबुन के अणु में एक जलप्रिय तथा एक जलविकर्षी भाग होता है, जिसके कारण यह तेल और गंदगी को हटाने में सक्षम होता है। साबुन का उपयोग दैनिक जीवन में सफाई और स्वच्छता बनाए रखने के लिए किया जाता है।
12. साबुन की सफाई क्रिया को समझाइए।
उत्तर:
साबुन के अणु का एक सिरा जलप्रिय (हाइड्रोफिलिक) तथा दूसरा सिरा जलविकर्षी (हाइड्रोफोबिक) होता है। जब साबुन पानी में डाला जाता है, तो इसके अणु माइसेल बनाते हैं। जलविकर्षी भाग तेल या गंदगी के कणों से जुड़ जाता है जबकि जलप्रिय भाग पानी की ओर रहता है। परिणामस्वरूप गंदगी छोटे-छोटे गोलाकार कणों में घिर जाती है और पानी से धोकर हट जाती है। इसी कारण साबुन कपड़ों और त्वचा की सफाई में प्रभावी होता है।
13. कठोर जल में साबुन कम प्रभावी क्यों होता है?
उत्तर:
कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम के लवण घुले रहते हैं। जब साबुन ऐसे जल में प्रयोग किया जाता है, तो यह इन आयनों के साथ अभिक्रिया करके अघुलनशील अवक्षेप (स्कम) बनाता है। इस प्रक्रिया में साबुन की काफी मात्रा व्यर्थ हो जाती है और झाग कम बनता है। परिणामस्वरूप सफाई की क्षमता घट जाती है। इसी कारण कठोर जल में अपमार्जकों (डिटर्जेंट) का उपयोग अधिक उपयुक्त माना जाता है।
14. अपमार्जक (Detergent) क्या हैं?
उत्तर:
अपमार्जक कृत्रिम सफाई पदार्थ होते हैं जो सल्फेट या सल्फोनेट लवणों से बनाए जाते हैं। ये कठोर तथा मृदु दोनों प्रकार के जल में प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं क्योंकि ये कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ अवक्षेप नहीं बनाते। डिटर्जेंट कपड़े धोने के पाउडर और तरल क्लीनर के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। इनकी सफाई क्षमता अधिक होती है, इसलिए घरेलू एवं औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में इनका प्रयोग किया जाता है।
15. हाइड्रोजनीकरण क्या है?
उत्तर:
असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों में उपस्थित द्वि या त्रि-बंधों पर निकेल या पैलेडियम उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़ने की प्रक्रिया को हाइड्रोजनीकरण कहते हैं। इस अभिक्रिया में असंतृप्त यौगिक संतृप्त यौगिक में परिवर्तित हो जाते हैं। उदाहरण के लिए वनस्पति तेलों को हाइड्रोजनीकरण द्वारा वनस्पति घी में बदला जाता है। खाद्य उद्योग में इस प्रक्रिया का अत्यधिक महत्व है क्योंकि इससे तेलों की स्थिरता और उपयोगिता बढ़ जाती है।
16. दहन अभिक्रिया क्या है?
उत्तर:
जब कोई कार्बन यौगिक ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलता है और ऊष्मा तथा प्रकाश उत्पन्न करता है, तो उसे दहन अभिक्रिया कहते हैं। पूर्ण दहन में कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनते हैं। उदाहरण के लिए मीथेन का दहन अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न करता है। यही कारण है कि कार्बन यौगिकों का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। यदि ऑक्सीजन की मात्रा कम हो तो अपूर्ण दहन होता है और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी विषैली गैस बन सकती है।
17. कार्बन के अपररूप (Allotropes) क्या हैं?
उत्तर:
जब कोई तत्व एक ही भौतिक अवस्था में विभिन्न संरचनात्मक रूपों में पाया जाता है, तो उन रूपों को अपररूप कहते हैं। कार्बन के प्रमुख अपररूप हीरा और ग्रेफाइट हैं। हीरा अत्यंत कठोर होता है तथा विद्युत का कुचालक है। दूसरी ओर, ग्रेफाइट मुलायम होता है और विद्युत का सुचालक है। इन दोनों के गुणों में अंतर उनकी संरचना के कारण होता है। उद्योगों और वैज्ञानिक उपकरणों में इनका व्यापक उपयोग किया जाता है।
18. मीथेन के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
मीथेन (CH₄) सबसे सरल हाइड्रोकार्बन है और प्राकृतिक गैस का प्रमुख घटक है। इसका उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में खाना पकाने तथा जल गर्म करने में किया जाता है। इसके अतिरिक्त मीथेन का उपयोग रसायन उद्योग में मेथनॉल, हाइड्रोजन तथा अन्य कार्बनिक यौगिकों के निर्माण में किया जाता है। यह स्वच्छ ईंधन माना जाता है क्योंकि इसके दहन से अपेक्षाकृत कम प्रदूषण होता है।
19. ऑक्सीकरण अभिक्रिया क्या है?
उत्तर:
जिस अभिक्रिया में किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का योग या हाइड्रोजन का निष्कासन होता है, उसे ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरण के लिए एथेनॉल का ऑक्सीकरण करके एथेनॉइक अम्ल बनाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में पोटैशियम डाइक्रोमेट या क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट जैसे ऑक्सीकारक प्रयुक्त होते हैं। कार्बनिक रसायन में ऑक्सीकरण अभिक्रियाओं का महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि इनके माध्यम से अनेक उपयोगी यौगिकों का निर्माण किया जाता है।
20. कार्बन एवं उसके यौगिकों का महत्व लिखिए।
उत्तर:
कार्बन जीवन का आधार तत्व है। सभी जीवित प्राणियों में पाए जाने वाले प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा न्यूक्लिक अम्ल कार्बन युक्त होते हैं। कार्बन के यौगिक ईंधन, औषधि, प्लास्टिक, कृत्रिम रेशे, रबर तथा सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में उपयोग किए जाते हैं। कार्बन की चतुसंयोजकता और श्रृंखलन क्षमता के कारण लाखों कार्बनिक यौगिक अस्तित्व में हैं। आधुनिक उद्योग, कृषि तथा चिकित्सा विज्ञान में कार्बन यौगिकों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।
