CBSE कक्षा 10 विज्ञान (जीव विज्ञान)

अध्याय 5 – हमारा पर्यावरण

20 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

(प्रत्येक उत्तर सत्र 2026–27 के अनुसार)


1. पर्यावरण से क्या तात्पर्य है? इसके मुख्य घटक बताइए।

उत्तर:
पर्यावरण उन सभी जैविक तथा अजैविक कारकों का समुच्चय है जो जीवों को प्रभावित करते हैं और जिनके साथ वे निरंतर क्रिया-प्रतिक्रिया करते हैं। पर्यावरण के दो मुख्य घटक होते हैं—जैविक (Biotic) और अजैविक (Abiotic)। जैविक घटकों में पौधे, पशु, मनुष्य, जीवाणु तथा कवक आदि शामिल होते हैं, जबकि अजैविक घटकों में वायु, जल, मिट्टी, तापमान तथा सूर्य का प्रकाश आते हैं। सभी जीव अपने अस्तित्व के लिए इन घटकों पर निर्भर रहते हैं। पर्यावरण जीवों को भोजन, आश्रय और ऊर्जा प्रदान करता है तथा पृथ्वी पर जीवन के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


2. पारितंत्र (Ecosystem) क्या है? इसके घटकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
पारितंत्र प्रकृति की एक कार्यात्मक इकाई है जिसमें जीवित तथा निर्जीव घटक परस्पर क्रिया करते हैं। इसके जैविक घटकों में उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक शामिल होते हैं। उत्पादक जैसे हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं। उपभोक्ता इस भोजन पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर रहते हैं। अपघटक मृत जीवों को विघटित करके पोषक तत्वों को पुनः पर्यावरण में लौटाते हैं। अजैविक घटकों में जल, मिट्टी, वायु, तापमान तथा खनिज पदार्थ आते हैं। पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह और पदार्थों का चक्रण लगातार चलता रहता है, जिससे प्राकृतिक संतुलन बना रहता है।


3. खाद्य श्रृंखला क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:
खाद्य श्रृंखला जीवों की वह क्रमबद्ध व्यवस्था है जिसमें एक जीव दूसरे जीव को भोजन के रूप में ग्रहण करता है। इसमें ऊर्जा उत्पादकों से विभिन्न उपभोक्ताओं तक पहुँचती है। उदाहरण के लिए—घास → हिरण → बाघ। यहाँ घास उत्पादक है, हिरण प्राथमिक उपभोक्ता तथा बाघ द्वितीयक उपभोक्ता है। खाद्य श्रृंखला ऊर्जा प्रवाह का मार्ग दर्शाती है। प्रत्येक स्तर को पोषण स्तर (Trophic Level) कहा जाता है। खाद्य श्रृंखला के माध्यम से पारितंत्र में ऊर्जा का एकदिशीय प्रवाह होता है। यदि किसी एक स्तर में बाधा आती है तो संपूर्ण पारितंत्र प्रभावित हो सकता है।


4. खाद्य जाल (Food Web) क्या है? इसका महत्व बताइए।

उत्तर:
जब अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़कर जटिल जाल का निर्माण करती हैं, तो उसे खाद्य जाल कहते हैं। प्राकृतिक पारितंत्रों में जीव केवल एक ही प्रकार के भोजन पर निर्भर नहीं रहते, इसलिए कई खाद्य श्रृंखलाएँ परस्पर जुड़ी रहती हैं। खाद्य जाल पारितंत्र की स्थिरता बनाए रखने में सहायक होता है। यदि किसी एक जीव की संख्या कम हो जाए, तो अन्य खाद्य स्रोत उपलब्ध रहते हैं और जीवों का अस्तित्व बना रहता है। इस प्रकार खाद्य जाल जैव विविधता को बढ़ावा देता है तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


5. पोषण स्तर (Trophic Level) क्या है?

उत्तर:
खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक चरण को पोषण स्तर या ट्रॉफिक लेवल कहा जाता है। पहला पोषण स्तर उत्पादकों का होता है, जो स्वयं भोजन बनाते हैं। दूसरा स्तर प्राथमिक उपभोक्ताओं का होता है, जो पौधों को खाते हैं। तीसरा स्तर द्वितीयक उपभोक्ताओं का तथा चौथा स्तर तृतीयक उपभोक्ताओं का होता है। उदाहरण—घास → टिड्डा → मेंढक → साँप। यहाँ घास प्रथम, टिड्डा द्वितीय, मेंढक तृतीय तथा साँप चतुर्थ पोषण स्तर पर है। ऊर्जा प्रत्येक स्तर पर कम होती जाती है, इसलिए सामान्यतः खाद्य श्रृंखला में चार या पाँच स्तर ही पाए जाते हैं।


6. अपघटक (Decomposers) की भूमिका क्या है?

उत्तर:
अपघटक ऐसे सूक्ष्मजीव होते हैं जो मृत पौधों, पशुओं तथा जैविक अपशिष्टों को सरल पदार्थों में बदल देते हैं। जीवाणु और कवक इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये मृत जीवों के अवशेषों को विघटित करके कार्बन, नाइट्रोजन तथा अन्य पोषक तत्वों को मिट्टी में वापस पहुँचाते हैं। इससे पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण होता है और पौधों को पुनः पोषण प्राप्त होता है। यदि अपघटक न हों तो मृत जीवों का ढेर लग जाएगा और पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा। अतः पारितंत्र में पदार्थों के चक्रण तथा स्वच्छता बनाए रखने में अपघटकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


7. जैव निम्नीकरणीय (Biodegradable) पदार्थ क्या हैं?

उत्तर:
वे पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों द्वारा सरल एवं हानिरहित पदार्थों में विघटित किए जा सकते हैं, जैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण के लिए—कागज, लकड़ी, फल-सब्जियों के छिलके, कपास आदि। ये पदार्थ प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा नष्ट हो जाते हैं और पर्यावरण में लंबे समय तक नहीं रहते। इनका उचित प्रबंधन करने पर पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। जैव निम्नीकरणीय पदार्थों से खाद भी बनाई जा सकती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। इसलिए इनका उपयोग पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।


8. अजैव निम्नीकरणीय (Non-Biodegradable) पदार्थ क्या हैं?

उत्तर:
वे पदार्थ जो प्राकृतिक रूप से सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित नहीं किए जा सकते, अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं। प्लास्टिक, काँच, पॉलीथीन, कीटनाशक तथा धातुओं के कुछ अपशिष्ट इसके उदाहरण हैं। ये पदार्थ लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं और प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करने पर ये जैव आवर्धन का कारण बनते हैं। इनके अत्यधिक उपयोग से भूमि, जल तथा वायु प्रदूषित होते हैं। इसलिए इनके उपयोग को कम करना, पुनर्चक्रण करना तथा सुरक्षित निपटान करना आवश्यक है।


9. जैव आवर्धन (Biological Magnification) क्या है?

उत्तर:
खाद्य श्रृंखला के विभिन्न पोषण स्तरों में अजैव निम्नीकरणीय विषैले पदार्थों की सांद्रता का बढ़ना जैव आवर्धन कहलाता है। उदाहरण के लिए, DDT तथा पारा जैसे रसायन जल में प्रवेश करते हैं और छोटे जीवों द्वारा ग्रहण किए जाते हैं। जैसे-जैसे ये पदार्थ खाद्य श्रृंखला में ऊपर जाते हैं, उनकी मात्रा बढ़ती जाती है। परिणामस्वरूप शीर्ष उपभोक्ताओं के शरीर में इनकी सांद्रता सबसे अधिक हो जाती है। इससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। जैव आवर्धन पर्यावरण प्रदूषण का एक प्रमुख दुष्प्रभाव है।


10. 10% नियम क्या है?

उत्तर:
10% नियम के अनुसार किसी भी पोषण स्तर की कुल ऊर्जा का केवल लगभग 10 प्रतिशत भाग ही अगले पोषण स्तर तक पहुँचता है। शेष 90 प्रतिशत ऊर्जा जीवों द्वारा जीवन क्रियाओं में उपयोग हो जाती है या ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है। उदाहरण के लिए यदि पौधों में 1000 जूल ऊर्जा है, तो शाकाहारियों को केवल 100 जूल ऊर्जा प्राप्त होगी। इसी प्रकार अगले स्तर को 10 जूल ऊर्जा मिलेगी। यही कारण है कि खाद्य श्रृंखला में पोषण स्तरों की संख्या सीमित होती है और शीर्ष उपभोक्ताओं की संख्या कम होती है।


11. ओजोन परत क्या है और इसका महत्व क्या है?

उत्तर:
ओजोन परत वायुमंडल के समताप मंडल में स्थित ओजोन गैस (O₃) की एक परत है। यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित करती है। यदि यह परत न हो तो UV किरणें पृथ्वी पर जीवन को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं। इन किरणों से त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद तथा फसलों को क्षति हो सकती है। इसलिए ओजोन परत पृथ्वी के लिए एक सुरक्षात्मक कवच का कार्य करती है। इसके संरक्षण के लिए ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के उपयोग को कम करना आवश्यक है।


12. ओजोन का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर:
समताप मंडल में सूर्य की पराबैंगनी किरणें ऑक्सीजन (O₂) अणुओं को तोड़कर स्वतंत्र ऑक्सीजन परमाणु बनाती हैं। ये परमाणु अन्य ऑक्सीजन अणुओं के साथ मिलकर ओजोन (O₃) का निर्माण करते हैं। यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है और ओजोन परत को बनाए रखती है। ओजोन पृथ्वी पर आने वाली हानिकारक UV किरणों को अवशोषित कर जीवन की रक्षा करती है। इसलिए इसका निर्माण और संरक्षण दोनों अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।


13. CFC गैसें ओजोन परत को कैसे प्रभावित करती हैं?

उत्तर:
क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) गैसें रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर तथा एरोसोल स्प्रे में उपयोग की जाती थीं। ये गैसें वायुमंडल में पहुँचकर क्लोरीन परमाणु मुक्त करती हैं। क्लोरीन ओजोन अणुओं को तोड़ देता है, जिससे ओजोन परत पतली होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप अधिक मात्रा में पराबैंगनी किरणें पृथ्वी तक पहुँचती हैं। इससे मनुष्यों, पशुओं तथा पौधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी कारण विश्व स्तर पर CFC के उपयोग को कम करने के प्रयास किए गए हैं।


14. कचरा प्रबंधन की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर:
बढ़ती जनसंख्या और औद्योगीकरण के कारण कचरे की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। यदि इसका उचित निपटान न किया जाए तो पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है। कचरे से भूमि, जल और वायु प्रदूषण बढ़ता है तथा विभिन्न रोग फैल सकते हैं। उचित कचरा प्रबंधन से संसाधनों का पुनः उपयोग संभव होता है और प्रदूषण कम किया जा सकता है। इसके अंतर्गत पुनर्चक्रण, कम्पोस्ट निर्माण, लैंडफिल तथा अपशिष्ट जल उपचार जैसी विधियाँ अपनाई जाती हैं। स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण बनाए रखने के लिए कचरा प्रबंधन आवश्यक है।


15. पुनर्चक्रण (Recycling) क्या है? इसके लाभ बताइए।

उत्तर:
पुनर्चक्रण वह प्रक्रिया है जिसमें प्रयुक्त वस्तुओं को पुनः उपयोगी उत्पादों में बदला जाता है। कागज, प्लास्टिक, काँच तथा धातुओं का पुनर्चक्रण किया जा सकता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है तथा कचरे की मात्रा कम होती है। पुनर्चक्रण ऊर्जा की भी बचत करता है और पर्यावरण प्रदूषण को कम करता है। यह सतत विकास को बढ़ावा देता है तथा पृथ्वी के सीमित संसाधनों के संरक्षण में सहायता करता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पुनर्चक्रण की आदत अपनानी चाहिए।


16. यदि किसी खाद्य श्रृंखला का एक पोषण स्तर समाप्त हो जाए तो क्या होगा?

उत्तर:
यदि खाद्य श्रृंखला का कोई एक पोषण स्तर समाप्त हो जाए, तो पारितंत्र का संतुलन बिगड़ जाएगा। उदाहरण के लिए यदि शाकाहारी जीव समाप्त हो जाएँ, तो मांसाहारी जीवों को भोजन नहीं मिलेगा और उनकी संख्या घटने लगेगी। दूसरी ओर उत्पादकों की संख्या बढ़ सकती है। इसी प्रकार किसी भी स्तर के हटने से ऊर्जा प्रवाह प्रभावित होगा और खाद्य जाल में असंतुलन उत्पन्न होगा। इसलिए प्रत्येक जीव पारितंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और किसी भी स्तर को हटाना पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है।


17. ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय क्यों कहलाता है?

उत्तर:
पारितंत्र में ऊर्जा सूर्य से उत्पादकों तक तथा फिर विभिन्न उपभोक्ताओं तक पहुँचती है। प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा का एक बड़ा भाग ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है और वापस उपयोग में नहीं आता। इसलिए ऊर्जा पुनर्चक्रित नहीं होती, बल्कि केवल एक दिशा में प्रवाहित होती है। यही कारण है कि ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय कहलाता है। इसके विपरीत पदार्थों का चक्रण होता रहता है। ऊर्जा के इस सिद्धांत को समझना पारितंत्र की कार्यप्रणाली को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।


18. कम्पोस्ट निर्माण क्या है?

उत्तर:
कम्पोस्ट निर्माण जैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों को विघटित करके जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया है। इसमें पत्तियाँ, फल-सब्जियों के अवशेष तथा अन्य जैविक पदार्थ उपयोग किए जाते हैं। सूक्ष्मजीव इन पदार्थों को विघटित करके पोषक तत्वों से भरपूर खाद बनाते हैं। यह खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करती है। कम्पोस्ट निर्माण कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन का एक प्रभावी उपाय है और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।


19. पर्यावरण संरक्षण में विद्यार्थियों की क्या भूमिका हो सकती है?

उत्तर:
विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे वृक्षारोपण कर सकते हैं, प्लास्टिक का उपयोग कम कर सकते हैं तथा कचरे का पृथक्करण कर सकते हैं। जल और ऊर्जा की बचत करना भी पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण कदम है। विद्यार्थियों को पुनर्चक्रण और कम्पोस्ट निर्माण जैसी गतिविधियों में भाग लेना चाहिए। साथ ही, वे समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाकर अन्य लोगों को भी प्रेरित कर सकते हैं। छोटी-छोटी आदतें मिलकर पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान दे सकती हैं।


20. “हमारा पर्यावरण” अध्याय का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर:
इस अध्याय का मुख्य संदेश है कि सभी जीव और उनका पर्यावरण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल और अपघटकों की भूमिका प्राकृतिक संतुलन बनाए रखती है। मानव गतिविधियाँ यदि अनियंत्रित हों तो प्रदूषण, जैव आवर्धन तथा ओजोन परत की क्षति जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, कचरा प्रबंधन तथा जैव विविधता का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। स्वस्थ पर्यावरण ही पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता सुनिश्चित करता है।