नीचे CBSE कक्षा 10 विज्ञान (भौतिक विज्ञान) अध्याय 4 – “विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव” के लिए 20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर दिए गए हैं। ये प्रश्न 2026-27 के नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम के प्रमुख विषयों जैसे चुंबकीय क्षेत्र, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ, धारा-वाहक चालक, परिनालिका (Solenoid), फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम, प्रत्यावर्ती धारा तथा घरेलू विद्युत परिपथ पर आधारित हैं।


1. चुंबकीय क्षेत्र क्या है? इसकी पहचान कैसे की जाती है?

उत्तर:
चुंबकीय क्षेत्र वह क्षेत्र होता है जहाँ किसी चुंबक या विद्युत धारा-वाहक चालक का चुंबकीय प्रभाव अनुभव किया जा सकता है। यदि किसी स्थान पर चुंबकीय सुई रखी जाए और वह विक्षेपित हो जाए, तो यह उस स्थान पर चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति को दर्शाता है। चुंबकीय क्षेत्र को चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इन रेखाओं की दिशा उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर होती है। जहाँ क्षेत्र रेखाएँ अधिक सघन होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होता है। विद्युत मोटर, जनरेटर तथा अनेक विद्युत उपकरण इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।


2. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और तीव्रता को दर्शाती हैं। इनकी दो प्रमुख विशेषताएँ हैं—

  1. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के बाहर उत्तर ध्रुव से निकलकर दक्षिण ध्रुव में प्रवेश करती हैं तथा चुंबक के भीतर दक्षिण से उत्तर की ओर जाकर बंद वक्र बनाती हैं।
  2. कोई भी दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटतीं। यदि वे काटेंगी, तो प्रतिच्छेदन बिंदु पर क्षेत्र की दो दिशाएँ हो जाएँगी, जो असंभव है।

इन गुणों के आधार पर चुंबकीय क्षेत्र की प्रकृति और दिशा का अध्ययन किया जाता है।


3. ऑर्स्टेड के प्रयोग का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
1820 में वैज्ञानिक हांस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड ने पाया कि जब किसी चालक तार में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके पास रखी चुंबकीय सुई विक्षेपित हो जाती है। इससे सिद्ध हुआ कि विद्युत धारा चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करती है। जब धारा की दिशा बदली जाती है, तो सुई का विक्षेपण भी विपरीत दिशा में हो जाता है। इस प्रयोग ने विद्युत और चुंबकत्व के बीच संबंध को स्पष्ट किया। आधुनिक विद्युत मोटर, विद्युत घंटी तथा इलेक्ट्रोमैग्नेट जैसे उपकरण इसी खोज पर आधारित हैं।


4. दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम क्या है?

उत्तर:
दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम मैक्सवेल द्वारा दिया गया था। इसके अनुसार यदि किसी सीधे चालक को दाएँ हाथ से इस प्रकार पकड़ा जाए कि अंगूठा धारा की दिशा में संकेत करे, तो मुड़ी हुई उंगलियाँ चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाती हैं। इस नियम की सहायता से धारा-वाहक चालक के आसपास बनने वाले चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात की जाती है। यह नियम विद्युत चुंबकीय घटनाओं को समझने में अत्यंत उपयोगी है।


5. धारा-वाहक सीधे चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र कैसा बनता है?

उत्तर:
जब किसी सीधे चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके चारों ओर संकेंद्रित वृत्ताकार चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बनती हैं। ये रेखाएँ चालक के चारों ओर केंद्रित होती हैं और उनकी दिशा दाएँ हाथ के अंगूठे के नियम से निर्धारित की जाती है। चालक के निकट चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होता है, जबकि दूरी बढ़ने पर इसकी तीव्रता घटती जाती है। चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति चालक में प्रवाहित धारा की मात्रा पर भी निर्भर करती है।


6. वृत्ताकार कुंडली द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर:
जब किसी वृत्ताकार कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके प्रत्येक भाग द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र केंद्र पर मिलकर अधिक प्रबल क्षेत्र उत्पन्न करता है। कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र सबसे अधिक होता है। कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाने या धारा बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता भी बढ़ जाती है। इसी सिद्धांत का उपयोग विद्युत चुंबक तथा मोटरों में किया जाता है। वृत्ताकार कुंडली एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने का सरल साधन है।


7. परिनालिका (Solenoid) क्या है?

उत्तर:
परिनालिका एक लंबी बेलनाकार कुंडली होती है जिसमें ताँबे के तार के अनेक फेरे पास-पास लपेटे जाते हैं। जब इसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। परिनालिका का चुंबकीय क्षेत्र दंड चुंबक के समान होता है तथा इसके दोनों सिरों पर उत्तर और दक्षिण ध्रुव बन जाते हैं। परिनालिका का उपयोग विद्युत चुंबक, रिले तथा विभिन्न विद्युत उपकरणों में किया जाता है।


8. विद्युत चुंबक क्या है? इसके दो उपयोग लिखिए।

उत्तर:
जब किसी परिनालिका के भीतर नरम लोहे की छड़ रखकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह अस्थायी रूप से शक्तिशाली चुंबक बन जाती है। इसे विद्युत चुंबक कहते हैं। धारा बंद करने पर इसका चुंबकत्व समाप्त हो जाता है।

उपयोग:

  1. कबाड़ से लोहे के भारी टुकड़े उठाने वाली क्रेनों में।
  2. विद्युत घंटी, रिले और मोटरों में।

विद्युत चुंबकों की विशेषता यह है कि उनकी शक्ति को नियंत्रित किया जा सकता है।


9. परिनालिका द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?

उत्तर:
परिनालिका द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता निम्न कारकों पर निर्भर करती है—

  1. परिनालिका में प्रवाहित विद्युत धारा की मात्रा।
  2. परिनालिका के प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या।
  3. परिनालिका के भीतर प्रयुक्त कोर (जैसे नरम लोहा) का प्रकार।

यदि धारा या फेरों की संख्या बढ़ा दी जाए, तो चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल हो जाता है। नरम लोहे का कोर उपयोग करने पर क्षेत्र की शक्ति और बढ़ जाती है।


10. फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम क्या है?

उत्तर:
फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम के अनुसार यदि बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा तथा अंगूठे को एक-दूसरे के लंबवत रखा जाए, तो तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा, मध्यमा धारा की दिशा तथा अंगूठा चालक पर लगने वाले बल या गति की दिशा को प्रदर्शित करता है। यह नियम विद्युत मोटरों में चालक की गति की दिशा ज्ञात करने के लिए प्रयोग किया जाता है। विद्युत मोटर का कार्य इसी सिद्धांत पर आधारित है।


11. धारा-वाहक चालक पर चुंबकीय क्षेत्र में बल क्यों लगता है?

उत्तर:
जब कोई धारा-वाहक चालक किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो चालक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र तथा बाहरी चुंबकीय क्षेत्र परस्पर क्रिया करते हैं। इस पारस्परिक क्रिया के कारण चालक पर एक बल कार्य करता है। बल की दिशा चुंबकीय क्षेत्र और धारा की दिशा पर निर्भर करती है तथा इसे फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम द्वारा ज्ञात किया जाता है। यही सिद्धांत विद्युत मोटर के संचालन का आधार है।


12. प्रत्यक्ष धारा (DC) क्या है?

उत्तर:
प्रत्यक्ष धारा (Direct Current या DC) वह विद्युत धारा है जो सदैव एक ही दिशा में प्रवाहित होती है। बैटरी, सेल तथा सौर सेल प्रत्यक्ष धारा के प्रमुख स्रोत हैं। DC का परिमाण समय के साथ सामान्यतः स्थिर रहता है। इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल फोन, कंप्यूटर तथा बैटरी चालित यंत्रों में किया जाता है। DC में धारा की दिशा नहीं बदलती, इसलिए यह विशेष प्रकार के उपकरणों के लिए उपयुक्त होती है।


13. प्रत्यावर्ती धारा (AC) क्या है?

उत्तर:
प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current या AC) वह धारा है जिसकी दिशा और परिमाण समय के साथ नियमित रूप से बदलते रहते हैं। भारत में घरेलू विद्युत आपूर्ति AC के रूप में दी जाती है जिसकी आवृत्ति 50 हर्ट्ज होती है। इसका अर्थ है कि धारा प्रति सेकंड 50 बार दिशा बदलती है। AC का उत्पादन और लंबी दूरी तक संचरण अपेक्षाकृत सरल और किफायती होता है। यही कारण है कि बिजलीघरों से घरों तक AC का उपयोग किया जाता है।


14. AC के DC पर दो लाभ लिखिए।

उत्तर:
प्रत्यावर्ती धारा (AC) के प्रत्यक्ष धारा (DC) पर निम्नलिखित लाभ हैं—

  1. AC को ट्रांसफॉर्मर की सहायता से आसानी से उच्च या निम्न वोल्टता में परिवर्तित किया जा सकता है।
  2. लंबी दूरी तक विद्युत ऊर्जा के संचरण में AC में ऊर्जा की हानि कम होती है।

इन्हीं कारणों से विद्युत उत्पादन केंद्रों से उपभोक्ताओं तक बिजली पहुँचाने के लिए AC का उपयोग किया जाता है। आधुनिक विद्युत वितरण प्रणाली मुख्यतः AC पर आधारित है।


15. घरेलू विद्युत परिपथ में फ्यूज का क्या कार्य है?

उत्तर:
फ्यूज एक सुरक्षा उपकरण है जो अत्यधिक धारा प्रवाहित होने पर पिघलकर परिपथ को तोड़ देता है। यह उपकरणों को क्षति तथा आग लगने जैसी दुर्घटनाओं से बचाता है। फ्यूज तार निम्न गलनांक वाले पदार्थ से बनाया जाता है। जब परिपथ में धारा निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है, तो फ्यूज गर्म होकर पिघल जाता है और विद्युत आपूर्ति बंद कर देता है। यह घरेलू सुरक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण साधन है।


16. लघुपथन (Short Circuit) क्या है?

उत्तर:
जब विद्युत परिपथ में जीवित तार (Live Wire) और उदासीन तार (Neutral Wire) सीधे संपर्क में आ जाते हैं, तो परिपथ का प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है। परिणामस्वरूप अत्यधिक धारा प्रवाहित होने लगती है। इस स्थिति को लघुपथन या शॉर्ट सर्किट कहते हैं। इससे तार अत्यधिक गर्म हो सकते हैं और आग लगने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। फ्यूज और MCB जैसे सुरक्षा उपकरण इस खतरे से बचाते हैं।


17. अतिभारण (Overloading) क्या है?

उत्तर:
जब किसी विद्युत परिपथ में उसकी क्षमता से अधिक विद्युत उपकरण जोड़ दिए जाते हैं, तो अधिक धारा प्रवाहित होने लगती है। इस स्थिति को अतिभारण कहते हैं। अतिभारण के कारण तार गर्म हो जाते हैं और विद्युत दुर्घटना या आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसे रोकने के लिए उचित क्षमता के तार, फ्यूज तथा MCB का उपयोग किया जाता है। घरेलू विद्युत सुरक्षा में अतिभारण से बचाव अत्यंत आवश्यक है।


18. भू-संपर्कन (Earthing) क्यों किया जाता है?

उत्तर:
भू-संपर्कन विद्युत उपकरणों की सुरक्षा के लिए किया जाता है। इसमें उपकरण के धातु भाग को एक मोटे तार द्वारा पृथ्वी से जोड़ा जाता है। यदि किसी कारणवश धारा उपकरण के बाहरी धातु भाग में आ जाए, तो वह सीधे पृथ्वी में चली जाती है और उपयोगकर्ता को विद्युत झटका नहीं लगता। रेफ्रिजरेटर, गीजर, वॉशिंग मशीन आदि उपकरणों में भू-संपर्कन विशेष रूप से आवश्यक होता है।


19. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की सघनता क्या दर्शाती है?

उत्तर:
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की सघनता चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति को दर्शाती है। जहाँ क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे के अधिक निकट होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होता है। इसके विपरीत जहाँ रेखाएँ दूर-दूर होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र कमजोर होता है। किसी दंड चुंबक के ध्रुवों के पास क्षेत्र रेखाएँ अधिक सघन होती हैं, इसलिए वहाँ चुंबकीय प्रभाव सबसे अधिक होता है। यह गुण चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता को समझने में सहायता करता है।


20. विद्युत मोटर का कार्य सिद्धांत लिखिए।

उत्तर:
विद्युत मोटर उस सिद्धांत पर कार्य करती है कि चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारा-वाहक चालक पर बल कार्य करता है। जब मोटर की कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है और वह चुंबकीय क्षेत्र में स्थित होती है, तो कुंडली पर बल लगता है जिससे वह घूमने लगती है। फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम इस बल की दिशा बताता है। विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करती है। पंखा, मिक्सर, वॉशिंग मशीन और अनेक घरेलू उपकरण इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।