CBSE कक्षा 10 विज्ञान (जीव विज्ञान)

अध्याय 4 – आनुवंशिकता एवं विकास (Heredity and Evolution)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. आनुवंशिकता क्या है? इसका जीवों में क्या महत्व है?

उत्तर:
आनुवंशिकता वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा माता-पिता के गुण उनकी संतानों में स्थानांतरित होते हैं। यह गुण जीनों के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचते हैं। आनुवंशिकता के कारण संतान अपने माता-पिता से मिलती-जुलती दिखाई देती है, जैसे आँखों का रंग, बालों का प्रकार तथा शरीर की बनावट। यह जीवों की प्रजाति की निरंतरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आनुवंशिकता के कारण ही जीवों में समानताएँ और कुछ भिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं। यही भिन्नताएँ आगे चलकर विकास (Evolution) का आधार बनती हैं और जीवों को बदलते पर्यावरण के अनुसार अनुकूलन करने में सहायता करती हैं।


प्रश्न 2. जीन क्या होते हैं? उनका कार्य लिखिए।

उत्तर:
जीन आनुवंशिकता की मूल इकाइयाँ हैं जो गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं। ये DNA के विशेष खंड होते हैं जो किसी जीव के विशिष्ट गुणों को नियंत्रित करते हैं। प्रत्येक जीन किसी विशेष लक्षण जैसे ऊँचाई, त्वचा का रंग या रक्त समूह को निर्धारित करता है। जीन माता-पिता से संतानों में स्थानांतरित होकर गुणों का संचरण करते हैं। वे कोशिकाओं में प्रोटीन निर्माण को नियंत्रित करते हैं, जिससे जीव की संरचना और कार्य निर्धारित होते हैं। जीनों में होने वाले परिवर्तन (उत्परिवर्तन) नए लक्षण उत्पन्न कर सकते हैं, जो विकास की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


प्रश्न 3. मेंडल के एकल संकरण प्रयोग का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
ग्रेगर जॉन मेंडल ने मटर के पौधों पर एकल संकरण (Monohybrid Cross) का प्रयोग किया। उन्होंने शुद्ध लंबे (TT) और शुद्ध बौने (tt) पौधों का संकरण कराया। प्रथम संतति (F₁) में सभी पौधे लंबे प्राप्त हुए, जिससे पता चला कि लंबापन प्रभावी (Dominant) गुण है। जब F₁ पीढ़ी के पौधों का स्व-परागण कराया गया, तो F₂ पीढ़ी में लंबे और बौने पौधों का अनुपात 3:1 प्राप्त हुआ। इस प्रयोग से मेंडल ने प्रभुत्व के नियम (Law of Dominance) को सिद्ध किया तथा बताया कि गुण जोड़ों में विरासत में मिलते हैं।


प्रश्न 4. प्रभावी और अप्रभावी लक्षणों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
प्रभावी (Dominant) लक्षण वह होता है जो विषमयुग्मजी अवस्था में भी अपनी अभिव्यक्ति करता है। उदाहरण के लिए, मटर के पौधों में लंबा तना प्रभावी लक्षण है। दूसरी ओर, अप्रभावी (Recessive) लक्षण केवल समयुग्मजी अवस्था में ही व्यक्त होता है। उदाहरण के लिए, बौना तना अप्रभावी लक्षण है। यदि किसी जीव में एक प्रभावी और एक अप्रभावी जीन उपस्थित हो, तो केवल प्रभावी लक्षण दिखाई देगा। प्रभावी लक्षण को बड़े अक्षर तथा अप्रभावी लक्षण को छोटे अक्षर से दर्शाया जाता है। यह अवधारणा मेंडल के आनुवंशिक नियमों को समझने का आधार है।


प्रश्न 5. लिंग निर्धारण क्या है? मनुष्य में यह कैसे होता है?

उत्तर:
लिंग निर्धारण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी जीव की संतान का लिंग निर्धारित होता है। मनुष्य में कुल 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं, जिनमें एक जोड़ा लिंग गुणसूत्रों का होता है। स्त्रियों में XX तथा पुरुषों में XY गुणसूत्र पाए जाते हैं। स्त्री के सभी अंडाणु X गुणसूत्र वाले होते हैं, जबकि पुरुष के शुक्राणु X या Y गुणसूत्र वाले हो सकते हैं। यदि X शुक्राणु अंडाणु से मिल जाए तो XX संयोजन बनता है और लड़की जन्म लेती है। यदि Y शुक्राणु मिल जाए तो XY संयोजन बनता है और लड़का जन्म लेता है। इसलिए संतान का लिंग पिता द्वारा निर्धारित होता है।


प्रश्न 6. विविधता (Variation) क्या है? इसका महत्व बताइए।

उत्तर:
एक ही प्रजाति के जीवों के बीच पाए जाने वाले छोटे-छोटे अंतर विविधता कहलाते हैं। ये अंतर शारीरिक बनावट, रंग, आकार, व्यवहार या अन्य गुणों में हो सकते हैं। विविधता आनुवंशिक तथा पर्यावरणीय कारणों से उत्पन्न होती है। इसका महत्व यह है कि यह जीवों को बदलते पर्यावरण में जीवित रहने की क्षमता प्रदान करती है। यदि सभी जीव एक जैसे हों और पर्यावरण में अचानक परिवर्तन हो जाए, तो पूरी प्रजाति के नष्ट होने का खतरा बढ़ जाता है। विविधता प्राकृतिक चयन को संभव बनाती है और विकास की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


प्रश्न 7. अर्जित लक्षण और आनुवंशिक लक्षण में अंतर लिखिए।

उत्तर:
आनुवंशिक लक्षण वे गुण हैं जो जीनों के माध्यम से माता-पिता से संतानों में स्थानांतरित होते हैं। जैसे आँखों का रंग और रक्त समूह। दूसरी ओर, अर्जित लक्षण वे गुण हैं जो जीवनकाल में पर्यावरण, अभ्यास या अनुभव के कारण विकसित होते हैं। जैसे व्यायाम से विकसित मांसपेशियाँ या पढ़ाई से अर्जित ज्ञान। आनुवंशिक लक्षण संतानों में पहुँच सकते हैं, जबकि अर्जित लक्षण सामान्यतः अगली पीढ़ी में स्थानांतरित नहीं होते। यही कारण है कि किसी व्यक्ति की अर्जित क्षमताएँ उसके बच्चों में स्वतः नहीं पहुँचतीं।


प्रश्न 8. विकास (Evolution) से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:
विकास वह धीमी और निरंतर प्रक्रिया है जिसके द्वारा सरल जीवों से जटिल जीवों का निर्माण हुआ। यह प्रक्रिया लाखों वर्षों में घटित होती है। विकास का आधार आनुवंशिक विविधताएँ और प्राकृतिक चयन हैं। जीवों में उत्पन्न लाभदायक विविधताएँ उन्हें जीवित रहने में सहायता करती हैं और ये गुण अगली पीढ़ियों में पहुँचते रहते हैं। समय के साथ ऐसे परिवर्तन एक नई प्रजाति के निर्माण का कारण बन सकते हैं। जीवाश्म, समजात अंग तथा आणविक अध्ययन विकास के प्रमाण प्रदान करते हैं। विकास जीवों की उत्पत्ति और उनके आपसी संबंधों को समझने में सहायता करता है।


प्रश्न 9. प्राकृतिक चयन क्या है?

उत्तर:
प्राकृतिक चयन का सिद्धांत चार्ल्स डार्विन ने प्रस्तुत किया था। इसके अनुसार प्रकृति उन जीवों का चयन करती है जिनमें जीवित रहने और प्रजनन करने के लिए अनुकूल गुण होते हैं। प्रतिकूल गुण वाले जीव धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, किसी क्षेत्र में पर्यावरण परिवर्तन होने पर वही जीव अधिक जीवित रहेंगे जिनमें उस वातावरण के अनुसार अनुकूलन होगा। ये जीव अधिक संतति उत्पन्न करेंगे और उनके गुण आगे की पीढ़ियों में स्थानांतरित होंगे। इस प्रकार प्राकृतिक चयन विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है और नई प्रजातियों के निर्माण में योगदान देता है।


प्रश्न 10. जीवाश्म क्या हैं? उनका महत्व बताइए।

उत्तर:
जीवाश्म (Fossils) प्राचीन जीवों के संरक्षित अवशेष, छाप या निशान होते हैं जो चट्टानों में पाए जाते हैं। ये लाखों वर्ष पहले जीवित रहे जीवों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। जीवाश्म वैज्ञानिकों को यह समझने में सहायता करते हैं कि विभिन्न जीव कब अस्तित्व में थे और समय के साथ उनमें क्या परिवर्तन हुए। जीवाश्म विकास के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं क्योंकि वे जीवों के क्रमिक परिवर्तन को दर्शाते हैं। इनके अध्ययन से पृथ्वी पर जीवन के इतिहास तथा विभिन्न प्रजातियों के विकासक्रम का पता लगाया जा सकता है।


प्रश्न 11. समजात अंग क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:
समजात अंग (Homologous Organs) वे अंग होते हैं जिनकी मूल संरचना और उत्पत्ति समान होती है, लेकिन उनके कार्य भिन्न होते हैं। ये अंग समान पूर्वज होने का प्रमाण देते हैं। उदाहरण के लिए, मनुष्य का हाथ, व्हेल का फ्लिपर, चमगादड़ का पंख और घोड़े का अग्रपाद संरचनात्मक रूप से समान हैं, परंतु इनके कार्य अलग-अलग हैं। इन अंगों में हड्डियों की व्यवस्था लगभग समान होती है। समजात अंग यह दर्शाते हैं कि विभिन्न जीवों का विकास एक ही पूर्वज से हुआ है और विकास की प्रक्रिया के दौरान उनके कार्यों में परिवर्तन आया है।


प्रश्न 12. समरूप अंग क्या हैं? उदाहरण दीजिए।

उत्तर:
समरूप अंग (Analogous Organs) वे अंग होते हैं जिनका कार्य समान होता है, लेकिन उनकी संरचना और उत्पत्ति भिन्न होती है। ये अभिसारी विकास (Convergent Evolution) का प्रमाण माने जाते हैं। उदाहरण के लिए, पक्षियों के पंख और तितली के पंख दोनों उड़ने का कार्य करते हैं, परंतु उनकी संरचना और उत्पत्ति अलग-अलग होती है। पक्षियों के पंख हड्डियों से बने होते हैं जबकि तितली के पंख पतली झिल्लियों से बने होते हैं। समरूप अंग यह दर्शाते हैं कि अलग-अलग जीव समान पर्यावरणीय परिस्थितियों में समान प्रकार के अनुकूलन विकसित कर सकते हैं।


प्रश्न 13. मेंडल का प्रभुत्व का नियम लिखिए।

उत्तर:
मेंडल के प्रभुत्व के नियम (Law of Dominance) के अनुसार जब किसी लक्षण के दो विपरीत कारकों (Alleles) का संयोजन होता है, तो उनमें से केवल एक लक्षण अपनी अभिव्यक्ति करता है। इस व्यक्त होने वाले लक्षण को प्रभावी (Dominant) तथा छिपे रहने वाले लक्षण को अप्रभावी (Recessive) कहा जाता है। उदाहरण के लिए, मटर के पौधों में लंबा तना प्रभावी तथा बौना तना अप्रभावी होता है। जब लंबे और बौने पौधों का संकरण कराया जाता है, तो पहली पीढ़ी में सभी पौधे लंबे होते हैं। यह नियम आनुवंशिकता के मूल सिद्धांतों को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।


प्रश्न 14. DNA का आनुवंशिकता में क्या महत्व है?

उत्तर:
DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) आनुवंशिक सूचना का वाहक होता है। यह कोशिका के केंद्रक में स्थित गुणसूत्रों का प्रमुख घटक है। DNA में उपस्थित जीन जीवों के सभी आनुवंशिक गुणों को नियंत्रित करते हैं। यह माता-पिता से संतानों तक आनुवंशिक जानकारी पहुँचाने का कार्य करता है। DNA की प्रतिकृति बनने की क्षमता के कारण गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होते हैं। DNA में होने वाले छोटे परिवर्तन विविधता उत्पन्न करते हैं, जो विकास का आधार बनते हैं। इसलिए DNA को जीवन की आनुवंशिक रूपरेखा कहा जाता है।


प्रश्न 15. उत्परिवर्तन (Mutation) क्या है?

उत्तर:
उत्परिवर्तन DNA या जीन की संरचना में अचानक होने वाला स्थायी परिवर्तन है। यह प्राकृतिक रूप से या विकिरण तथा रसायनों जैसे कारकों के प्रभाव से हो सकता है। उत्परिवर्तन के कारण नए लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। कुछ उत्परिवर्तन लाभदायक होते हैं, जबकि कुछ हानिकारक भी हो सकते हैं। लाभदायक उत्परिवर्तन जीवों को पर्यावरण के प्रति बेहतर अनुकूलन प्रदान करते हैं और विकास की प्रक्रिया में योगदान देते हैं। उत्परिवर्तन आनुवंशिक विविधता का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और नई प्रजातियों के निर्माण में भी भूमिका निभा सकता है।


प्रश्न 16. कृत्रिम चयन क्या है?

उत्तर:
कृत्रिम चयन (Artificial Selection) वह प्रक्रिया है जिसमें मनुष्य अपनी आवश्यकता के अनुसार विशेष गुणों वाले जीवों का चयन करके उनका प्रजनन कराता है। इसका उद्देश्य बेहतर नस्लें विकसित करना होता है। उदाहरण के लिए, अधिक दूध देने वाली गायों या अधिक उत्पादन देने वाली फसलों का चयन कर उनकी नई किस्में विकसित की जाती हैं। कृत्रिम चयन में प्राकृतिक चयन की अपेक्षा मनुष्य की भूमिका प्रमुख होती है। यह कृषि, पशुपालन और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी है तथा मनुष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करता है।


प्रश्न 17. गुणसूत्र क्या हैं?

उत्तर:
गुणसूत्र (Chromosomes) कोशिका के केंद्रक में पाए जाने वाली धागेनुमा संरचनाएँ हैं, जो DNA और प्रोटीन से बनी होती हैं। इनमें जीन स्थित होते हैं, जो आनुवंशिक गुणों का नियंत्रण करते हैं। मनुष्य की प्रत्येक शरीर कोशिका में 46 गुणसूत्र अर्थात 23 जोड़े पाए जाते हैं। गुणसूत्र माता-पिता से संतानों में आनुवंशिक जानकारी पहुँचाने का कार्य करते हैं। कोशिका विभाजन के समय ये गुणसूत्र सही ढंग से वितरित होकर आनुवंशिक स्थिरता बनाए रखते हैं। गुणसूत्रों की संरचना और संख्या का अध्ययन आनुवंशिकी तथा विकास को समझने में महत्वपूर्ण है।


प्रश्न 18. विकास के प्रमाण के रूप में जीवाश्मों का महत्व बताइए।

उत्तर:
जीवाश्म विकास के सबसे महत्वपूर्ण प्रमाणों में से एक हैं। ये प्राचीन जीवों के अवशेष या उनके निशान होते हैं जो चट्टानों में सुरक्षित रहते हैं। जीवाश्मों के अध्ययन से वैज्ञानिक यह जान पाते हैं कि पृथ्वी पर विभिन्न जीव कब अस्तित्व में थे और समय के साथ उनमें क्या परिवर्तन हुए। विभिन्न कालों के जीवाश्मों की तुलना करने पर जीवों के क्रमिक विकास का पता चलता है। कुछ जीवाश्म ऐसे भी मिले हैं जो दो समूहों के बीच संक्रमणीय कड़ी (Connecting Link) का कार्य करते हैं। इस प्रकार जीवाश्म विकास के सिद्धांत को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।


Question 19. मानव विकास के बारे में संक्षेप में लिखिए।

उत्तर:
मानव विकास एक लंबी जैविक प्रक्रिया का परिणाम है। वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार मनुष्य और आधुनिक वानरों का एक सामान्य पूर्वज था। लाखों वर्षों के दौरान विभिन्न पर्यावरणीय परिवर्तनों और प्राकृतिक चयन के कारण मानव में अनेक शारीरिक और मानसिक परिवर्तन हुए। सीधा चलना, मस्तिष्क का विकास, भाषा का प्रयोग तथा औजारों का निर्माण मानव विकास की प्रमुख विशेषताएँ हैं। जीवाश्मों और आनुवंशिक अध्ययनों से मानव विकास की जानकारी प्राप्त होती है। मानव विकास यह दर्शाता है कि जीव समय के साथ बदलते रहते हैं और नई विशेषताएँ विकसित कर सकते हैं।


प्रश्न 20. आनुवंशिकता और विकास में क्या संबंध है?

उत्तर:
आनुवंशिकता और विकास एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। आनुवंशिकता के माध्यम से माता-पिता के गुण संतानों में स्थानांतरित होते हैं, जबकि विकास इन गुणों में होने वाले दीर्घकालिक परिवर्तनों का परिणाम है। आनुवंशिक विविधताएँ जीवों में नए लक्षण उत्पन्न करती हैं। यदि ये लक्षण जीवित रहने और प्रजनन में सहायक हों, तो वे अगली पीढ़ियों में स्थानांतरित होते रहते हैं। समय के साथ इन लाभदायक परिवर्तनों का संचय नई प्रजातियों के निर्माण का कारण बन सकता है। इस प्रकार आनुवंशिकता विकास की आधारभूत प्रक्रिया है और विकास उसका दीर्घकालिक परिणाम है।