CBSE कक्षा 10 विज्ञान (भौतिक विज्ञान)
अध्याय 3 – विद्युत (Electricity)
20 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. विद्युत धारा क्या है? इसका SI मात्रक क्या है?
उत्तर:
किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से एकांक समय में प्रवाहित होने वाले आवेश की मात्रा को विद्युत धारा कहते हैं। यदि किसी चालक से समय (t) में (Q) आवेश प्रवाहित हो, तो धारा (I = Q/t) होगी। विद्युत धारा एक अदिश राशि है और इसका SI मात्रक ऐम्पियर (A) है। एक ऐम्पियर धारा तब कहलाती है जब किसी चालक से एक सेकंड में एक कूलॉम आवेश प्रवाहित हो। विद्युत धारा की दिशा परंपरागत रूप से धनात्मक आवेश के प्रवाह की दिशा मानी जाती है, जबकि इलेक्ट्रॉन विपरीत दिशा में चलते हैं। घरेलू तथा औद्योगिक उपकरणों के संचालन में विद्युत धारा का महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रश्न 2. विद्युत विभवांतर से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
किसी चालक के दो बिंदुओं के बीच एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किए गए कार्य को उन बिंदुओं के बीच का विद्युत विभवांतर कहते हैं। यदि (W) कार्य करके (Q) आवेश को स्थानांतरित किया जाए, तो विभवांतर (V = W/Q) होगा। इसका SI मात्रक वोल्ट (V) है। एक वोल्ट वह विभवांतर है जिसमें एक कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में एक जूल कार्य किया जाता है। विद्युत परिपथ में धारा के प्रवाह के लिए विभवांतर आवश्यक होता है। विभवांतर को मापने के लिए वोल्टमीटर का उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 3. ओम का नियम क्या है?
उत्तर:
ओम का नियम विद्युत धारा और विभवांतर के बीच संबंध को दर्शाता है। इस नियम के अनुसार, यदि चालक का तापमान तथा अन्य भौतिक अवस्थाएँ स्थिर रहें, तो चालक में प्रवाहित धारा उसके सिरों के बीच लगाए गए विभवांतर के समानुपाती होती है। गणितीय रूप में,
[V = IR]
जहाँ (V) विभवांतर, (I) धारा तथा (R) प्रतिरोध है। इस नियम की खोज जर्मन वैज्ञानिक जॉर्ज साइमन ओम ने की थी। ओम का नियम विद्युत परिपथों के विश्लेषण और विभिन्न विद्युत उपकरणों के निर्माण में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।
प्रश्न 4. प्रतिरोध क्या है? किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
किसी चालक द्वारा विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करने के गुण को प्रतिरोध कहते हैं। इसका SI मात्रक ओम (Ω) है। प्रतिरोध चालक की लंबाई, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल, पदार्थ की प्रकृति तथा तापमान पर निर्भर करता है। चालक की लंबाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि क्षेत्रफल बढ़ने पर प्रतिरोध घटता है। प्रतिरोध का संबंध निम्न सूत्र से व्यक्त किया जाता है:
[R=\rho \frac{l}{A}]
जहाँ (\rho) पदार्थ का प्रतिरोधकता गुणांक है। प्रतिरोध विद्युत उपकरणों में धारा को नियंत्रित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 5. प्रतिरोधकता क्या है?
उत्तर:
किसी पदार्थ का वह गुण जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करने की उसकी क्षमता को दर्शाता है, प्रतिरोधकता कहलाता है। इसे (\rho) से व्यक्त किया जाता है। यह पदार्थ की आंतरिक विशेषता है और उसकी लंबाई या आकार पर निर्भर नहीं करती। इसका SI मात्रक ओम-मीटर (Ωm) है। उच्च प्रतिरोधकता वाले पदार्थ जैसे निक्रोम का उपयोग हीटर के तारों में किया जाता है, जबकि कम प्रतिरोधकता वाले पदार्थ जैसे तांबा और एल्यूमिनियम विद्युत तारों में प्रयुक्त होते हैं। प्रतिरोधकता से किसी पदार्थ की विद्युत चालकता का अनुमान लगाया जा सकता है।
प्रश्न 6. श्रेणीक्रम संयोजन क्या है?
उत्तर:
जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि धारा के प्रवाह के लिए केवल एक ही मार्ग उपलब्ध हो, तो उसे श्रेणीक्रम संयोजन कहते हैं। इस संयोजन में सभी प्रतिरोधों से समान धारा प्रवाहित होती है, जबकि कुल विभवांतर विभिन्न प्रतिरोधों में विभाजित हो जाता है। तुल्य प्रतिरोध का मान निम्न प्रकार होता है:
[R = R_1 + R_2 + R_3]
अर्थात कुल प्रतिरोध व्यक्तिगत प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है। इस प्रकार के संयोजन का उपयोग विद्युत सजावटी लड़ियों तथा कुछ विशेष परिपथों में किया जाता है।
प्रश्न 7. समानांतर संयोजन क्या है?
उत्तर:
जब प्रतिरोधों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर समान विभवांतर प्राप्त हो, तो उसे समानांतर संयोजन कहते हैं। इस संयोजन में धारा विभिन्न शाखाओं में विभाजित हो जाती है। तुल्य प्रतिरोध का संबंध निम्न प्रकार है:
[\frac{1}{R}=\frac{1}{R_1}+\frac{1}{R_2}+\frac{1}{R_3}]
समानांतर संयोजन में किसी एक उपकरण के खराब होने पर अन्य उपकरण कार्य करते रहते हैं। इसी कारण घरों में विद्युत उपकरणों को समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है। यह व्यवस्था अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मानी जाती है।
प्रश्न 8. विद्युत शक्ति क्या है?
उत्तर:
विद्युत ऊर्जा के उपयोग या व्यय की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं। इसे (P) से व्यक्त किया जाता है। यदि किसी उपकरण में (V) विभवांतर और (I) धारा हो, तो:
[P = VI]
इसका SI मात्रक वाट (W) है। एक वाट शक्ति तब उत्पन्न होती है जब एक वोल्ट विभवांतर पर एक ऐम्पियर धारा प्रवाहित हो। विद्युत शक्ति से यह ज्ञात होता है कि कोई उपकरण कितनी तेजी से विद्युत ऊर्जा का उपयोग करता है। बल्ब, पंखे, हीटर आदि उपकरणों पर उनकी शक्ति अंकित रहती है।
प्रश्न 9. विद्युत ऊर्जा क्या है?
उत्तर:
विद्युत उपकरणों द्वारा उपयोग की गई कुल विद्युत शक्ति और समय के गुणनफल को विद्युत ऊर्जा कहते हैं। इसका सूत्र है:
[E = Pt]
जहाँ (P) शक्ति तथा (t) समय है। इसका SI मात्रक जूल है, परंतु व्यावहारिक उपयोग में किलोवाट-घंटा (kWh) प्रयुक्त होता है। एक किलोवाट-घंटा ऊर्जा को एक यूनिट कहा जाता है। घरों में विद्युत बिल की गणना इसी आधार पर की जाती है। विद्युत ऊर्जा आधुनिक जीवन की मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है।
प्रश्न 10. जूल का तापन नियम क्या है?
उत्तर:
जूल के तापन नियम के अनुसार किसी चालक में उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध तथा समय के समानुपाती होती है। इसे निम्न सूत्र से व्यक्त किया जाता है:
[H = I^2Rt]
जहाँ (H) उत्पन्न ऊष्मा है। इस नियम की खोज वैज्ञानिक जेम्स प्रेस्कॉट जूल ने की थी। विद्युत इस्त्री, हीटर, गीजर तथा टोस्टर जैसे उपकरण इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं। यह नियम विद्युत ऊर्जा के ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तन को समझने में सहायक है।
प्रश्न 11. विद्युत परिपथ क्या है?
उत्तर:
विद्युत धारा के प्रवाह के लिए बनाया गया बंद मार्ग विद्युत परिपथ कहलाता है। इसमें सामान्यतः विद्युत स्रोत, चालक तार, स्विच तथा विद्युत उपकरण शामिल होते हैं। जब परिपथ बंद होता है, तब धारा प्रवाहित होती है और उपकरण कार्य करते हैं। यदि परिपथ खुला हो तो धारा का प्रवाह रुक जाता है। विद्युत परिपथ घरेलू तथा औद्योगिक विद्युत प्रणालियों का आधार है। इसके माध्यम से विद्युत ऊर्जा को विभिन्न उपकरणों तक पहुँचाया जाता है।
प्रश्न 12. ऐमीटर और वोल्टमीटर में अंतर बताइए।
उत्तर:
ऐमीटर विद्युत धारा मापने का उपकरण है, जबकि वोल्टमीटर विभवांतर मापने का उपकरण है। ऐमीटर को परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है ताकि पूरी धारा उससे होकर गुजरे। इसका आंतरिक प्रतिरोध बहुत कम होता है। दूसरी ओर वोल्टमीटर को समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है और इसका आंतरिक प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। ऐमीटर का मात्रक ऐम्पियर तथा वोल्टमीटर का मात्रक वोल्ट है। दोनों उपकरण विद्युत परिपथों के अध्ययन और परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 13. घरेलू परिपथों में उपकरण समानांतर क्रम में क्यों जोड़े जाते हैं?
उत्तर:
घरेलू विद्युत परिपथों में उपकरणों को समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है क्योंकि प्रत्येक उपकरण को समान विभवांतर प्राप्त होता है। इससे सभी उपकरण अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार कार्य करते हैं। यदि किसी एक उपकरण में खराबी आ जाए या उसे बंद कर दिया जाए, तो अन्य उपकरण प्रभावित नहीं होते। समानांतर संयोजन में प्रत्येक उपकरण को स्वतंत्र रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। यही कारण है कि घरों, कार्यालयों और उद्योगों में विद्युत उपकरणों का संयोजन समानांतर क्रम में किया जाता है।
Question 14. फ्यूज तार का कार्य क्या है?
उत्तर:
फ्यूज एक सुरक्षा उपकरण है जो विद्युत परिपथ को अत्यधिक धारा से बचाता है। यह कम गलनांक वाले विशेष मिश्रधातु से बना होता है। जब परिपथ में निर्धारित सीमा से अधिक धारा प्रवाहित होती है, तो फ्यूज तार गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है। इससे विद्युत उपकरणों तथा तारों को क्षति नहीं पहुँचती। फ्यूज का उपयोग घरों, कारखानों तथा विभिन्न विद्युत उपकरणों में सुरक्षा के लिए किया जाता है। यह शॉर्ट सर्किट और ओवरलोडिंग से बचाव का प्रभावी साधन है।
प्रश्न 15. शॉर्ट सर्किट क्या है?
उत्तर:
जब किसी परिपथ में जीवित तार और उदासीन तार सीधे संपर्क में आ जाते हैं तथा प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है, तो अत्यधिक धारा प्रवाहित होने लगती है। इस स्थिति को शॉर्ट सर्किट कहते हैं। इससे तार अत्यधिक गर्म हो सकते हैं और आग लगने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। शॉर्ट सर्किट के कारण विद्युत उपकरणों को भी नुकसान पहुँच सकता है। इससे बचाव के लिए फ्यूज, MCB तथा उचित विद्युत वायरिंग का उपयोग किया जाता है। यह विद्युत सुरक्षा का महत्वपूर्ण विषय है।
प्रश्न 16. 1 किलोवाट-घंटा क्या है?
उत्तर:
एक किलोवाट-घंटा विद्युत ऊर्जा की व्यावहारिक इकाई है। जब 1 किलोवाट शक्ति का कोई उपकरण 1 घंटे तक कार्य करता है, तब वह 1 किलोवाट-घंटा ऊर्जा की खपत करता है। इसे एक यूनिट विद्युत ऊर्जा भी कहा जाता है।
[1,kWh = 1000W \times 3600s = 3.6 \times 10^6 J]
घरेलू बिजली बिल में ऊर्जा की गणना इसी इकाई में की जाती है। विद्युत ऊर्जा की खपत जानने और बिजली बिल का आकलन करने में यह इकाई अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 17. चालक और कुचालक में अंतर बताइए।
उत्तर:
वे पदार्थ जिनमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित हो सकती है, चालक कहलाते हैं। उदाहरण: तांबा, एल्यूमिनियम और चाँदी। इनके इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। इसके विपरीत जिन पदार्थों में विद्युत धारा का प्रवाह बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता, उन्हें कुचालक कहते हैं। उदाहरण: रबर, प्लास्टिक और लकड़ी। कुचालकों का उपयोग विद्युत तारों के आवरण और सुरक्षा उपकरणों में किया जाता है। विद्युत प्रणालियों के सुरक्षित संचालन के लिए चालक और कुचालक दोनों का महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रश्न 18. निक्रोम का उपयोग हीटर के तारों में क्यों किया जाता है?
उत्तर:
निक्रोम एक मिश्रधातु है जिसकी प्रतिरोधकता अधिक होती है। अधिक प्रतिरोध होने के कारण इसमें धारा प्रवाहित होने पर पर्याप्त मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसके अतिरिक्त इसका गलनांक भी उच्च होता है, जिससे यह अत्यधिक तापमान सहन कर सकता है। निक्रोम आसानी से ऑक्सीकरण नहीं होता और लंबे समय तक टिकाऊ रहता है। इन गुणों के कारण इसका उपयोग विद्युत हीटर, गीजर, इस्त्री तथा टोस्टर के तापन तत्व बनाने में किया जाता है।
प्रश्न 19. विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव का अर्थ है कि चालक में धारा प्रवाहित होने पर ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसका पहला उपयोग विद्युत हीटर, गीजर तथा इस्त्री जैसे उपकरणों में किया जाता है, जहाँ ऊष्मा प्राप्त करना मुख्य उद्देश्य होता है। दूसरा उपयोग फ्यूज तार में होता है, जहाँ अत्यधिक धारा प्रवाहित होने पर फ्यूज गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ को सुरक्षित रखता है। इस प्रकार ऊष्मीय प्रभाव दैनिक जीवन और विद्युत सुरक्षा दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 20. घरेलू विद्युत सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियाँ लिखिए।
उत्तर:
घरेलू विद्युत सुरक्षा के लिए कई सावधानियाँ आवश्यक हैं। विद्युत उपकरणों को सूखे हाथों से ही छूना चाहिए। क्षतिग्रस्त तारों का उपयोग नहीं करना चाहिए। प्रत्येक परिपथ में उचित क्षमता का फ्यूज या MCB लगाया जाना चाहिए। ओवरलोडिंग से बचने के लिए एक ही सॉकेट में अनेक उपकरण नहीं जोड़ने चाहिए। विद्युत उपकरणों की नियमित जाँच और उचित अर्थिंग आवश्यक है। बच्चों को खुले तारों और स्विचों से दूर रखना चाहिए। इन सावधानियों का पालन करने से विद्युत दुर्घटनाओं तथा आग लगने जैसी घटनाओं से बचा जा सकता है।
