CBSE कक्षा 10 विज्ञान (जीव विज्ञान)

अध्याय 3 – जीव कैसे जनन करते हैं?

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

1. जनन क्या है? जीवों के लिए इसका क्या महत्व है?

उत्तर:
जनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने समान नई संतति उत्पन्न करते हैं। यह सभी जीवों की मूलभूत विशेषता है। जनन के कारण किसी प्रजाति की निरंतरता बनी रहती है और जीवों का अस्तित्व सुरक्षित रहता है। यदि जनन न हो तो किसी भी प्रजाति का धीरे-धीरे विलुप्त होना निश्चित है। जनन से आनुवंशिक गुण अगली पीढ़ी तक पहुँचते हैं। साथ ही, लैंगिक जनन के माध्यम से विविधताएँ उत्पन्न होती हैं, जो जीवों को बदलते पर्यावरण में अनुकूलन करने में सहायता करती हैं। इसलिए जनन केवल संख्या बढ़ाने का साधन नहीं बल्कि जीवन की निरंतरता बनाए रखने की प्रक्रिया है।


2. अलैंगिक जनन क्या है? इसके प्रमुख लाभ लिखिए।

उत्तर:
अलैंगिक जनन वह प्रक्रिया है जिसमें केवल एक जनक से नई संतति उत्पन्न होती है और युग्मकों का निर्माण नहीं होता। इस प्रकार के जनन में संतति अपने जनक के समान होती है। इसके प्रमुख लाभ हैं— यह प्रक्रिया सरल और तीव्र होती है, इसमें साथी की आवश्यकता नहीं होती तथा कम ऊर्जा खर्च होती है। अनुकूल परिस्थितियों में बड़ी संख्या में जीव शीघ्र उत्पन्न किए जा सकते हैं। अमीबा, यीस्ट और हाइड्रा जैसे जीव अलैंगिक जनन द्वारा अपनी संख्या बढ़ाते हैं। इस प्रकार का जनन विशेष रूप से उन जीवों के लिए लाभदायक है जो स्थिर वातावरण में रहते हैं।


3. द्विखंडन (Binary Fission) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:
द्विखंडन अलैंगिक जनन की एक विधि है जिसमें एक एककोशिकीय जीव दो समान भागों में विभाजित होकर दो नई संततियाँ बनाता है। इस प्रक्रिया में पहले कोशिका का केंद्रक विभाजित होता है, फिर कोशिकाद्रव्य दो भागों में बँट जाता है। परिणामस्वरूप दो स्वतंत्र जीव बन जाते हैं। अमीबा में द्विखंडन किसी भी दिशा में हो सकता है, जबकि पैरामीशियम में यह निश्चित दिशा में होता है। यह जनन विधि सरल, तीव्र तथा कम ऊर्जा वाली होती है। अनुकूल परिस्थितियों में जीवों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। इसलिए सूक्ष्मजीवों में यह सबसे सामान्य जनन विधि है।


4. बहुखंडन (Multiple Fission) क्या है?

उत्तर:
बहुखंडन अलैंगिक जनन की वह प्रक्रिया है जिसमें एक जनक जीव के केंद्रक का कई बार विभाजन होता है और बाद में कोशिका अनेक छोटी संततियों में विभाजित हो जाती है। यह प्रक्रिया सामान्यतः प्रतिकूल परिस्थितियों में होती है। उदाहरण के लिए प्लाज्मोडियम में बहुखंडन पाया जाता है। इसमें पहले अनेक केंद्रक बनते हैं, फिर प्रत्येक केंद्रक के चारों ओर कोशिकाद्रव्य एकत्र होकर नई संतति बनाता है। जब परिस्थितियाँ अनुकूल हो जाती हैं, तब ये संततियाँ बाहर निकलकर स्वतंत्र जीवन प्रारंभ करती हैं। इससे कम समय में बड़ी संख्या में नए जीव उत्पन्न हो जाते हैं।


5. मुकुलन (Budding) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:
मुकुलन अलैंगिक जनन की एक विधि है जिसमें जनक जीव के शरीर पर एक छोटी उभार या कली विकसित होती है। यह कली धीरे-धीरे बढ़ती है और पूर्ण विकसित होकर नए जीव का रूप ले लेती है। बाद में यह जनक से अलग होकर स्वतंत्र जीवन व्यतीत करती है। हाइड्रा और यीस्ट में मुकुलन द्वारा जनन होता है। यीस्ट में कोशिका पर एक छोटी कली बनती है जो बढ़कर नई कोशिका बन जाती है। यह प्रक्रिया अनुकूल परिस्थितियों में तेजी से होती है। मुकुलन द्वारा उत्पन्न संततियाँ आनुवंशिक रूप से अपने जनक के समान होती हैं।


6. पुनर्जनन (Regeneration) क्या है?

उत्तर:
पुनर्जनन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी जीव का टूटा हुआ भाग पुनः विकसित होकर पूर्ण जीव या शरीर का अंग बना लेता है। यह केवल कुछ विशेष जीवों में पाया जाता है। उदाहरण के लिए प्लैनैरिया और हाइड्रा में यदि शरीर के टुकड़े हो जाएँ तो प्रत्येक टुकड़ा नया जीव बना सकता है। पुनर्जनन विशेष कोशिकाओं की विभाजन क्षमता के कारण संभव होता है। यह प्रक्रिया जीव की मरम्मत और जीवित रहने में सहायता करती है। हालांकि सभी जीवों में पुनर्जनन की क्षमता नहीं होती। मनुष्यों में केवल कुछ ऊतकों की मरम्मत संभव होती है, पूर्ण जीव का निर्माण नहीं।


7. वनस्पतिक प्रवर्धन क्या है?

उत्तर:
वनस्पतिक प्रवर्धन पौधों में अलैंगिक जनन की एक विधि है जिसमें जड़, तना या पत्ती जैसे वनस्पतिक भागों से नया पौधा उत्पन्न होता है। इसमें बीजों की आवश्यकता नहीं होती। आलू, अदरक, गन्ना, गुलाब तथा ब्रायोफिलम इसके सामान्य उदाहरण हैं। किसान और बागवानी विशेषज्ञ इस विधि का उपयोग अच्छे गुणों वाले पौधों की संख्या बढ़ाने के लिए करते हैं। इस विधि से उत्पन्न सभी पौधे जनक पौधे के समान होते हैं। वनस्पतिक प्रवर्धन तेज, सरल और आर्थिक दृष्टि से उपयोगी जनन विधि है।


8. ऊतक संवर्धन (Tissue Culture) क्या है?

उत्तर:
ऊतक संवर्धन पौधों के कृत्रिम प्रवर्धन की आधुनिक तकनीक है। इसमें पौधे के किसी भाग या कुछ कोशिकाओं को पोषक माध्यम में प्रयोगशाला की नियंत्रित परिस्थितियों में उगाया जाता है। ये कोशिकाएँ विभाजित होकर नए पौधे का निर्माण करती हैं। इस तकनीक से कम समय में बड़ी संख्या में समान गुणों वाले पौधे प्राप्त किए जा सकते हैं। रोगमुक्त पौधों का उत्पादन भी संभव है। केले, ऑर्किड तथा सजावटी पौधों के उत्पादन में इसका व्यापक उपयोग होता है। कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में यह तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।


9. लैंगिक जनन क्या है?

उत्तर:
लैंगिक जनन वह प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा जनक द्वारा निर्मित युग्मकों के संलयन से नई संतति उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया में नर युग्मक और मादा युग्मक मिलकर युग्मनज (Zygote) बनाते हैं। युग्मनज आगे विकसित होकर नया जीव बनाता है। लैंगिक जनन का प्रमुख लाभ यह है कि इससे आनुवंशिक विविधताएँ उत्पन्न होती हैं। ये विविधताएँ जीवों को बदलते वातावरण में अनुकूलन और विकास में सहायता करती हैं। मनुष्य, अधिकांश जन्तु तथा पुष्पीय पौधे लैंगिक जनन करते हैं। यह प्रक्रिया प्रजातियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


10. लैंगिक जनन और अलैंगिक जनन में अंतर लिखिए।

उत्तर:
लैंगिक जनन में दो जनकों की आवश्यकता होती है, जबकि अलैंगिक जनन में केवल एक जनक पर्याप्त होता है। लैंगिक जनन में युग्मकों का निर्माण और उनका संलयन होता है, जबकि अलैंगिक जनन में युग्मक नहीं बनते। लैंगिक जनन से उत्पन्न संतति में विविधताएँ पाई जाती हैं, जबकि अलैंगिक जनन से उत्पन्न संतति जनक के समान होती है। लैंगिक जनन अपेक्षाकृत धीमा और जटिल होता है, जबकि अलैंगिक जनन सरल और तीव्र होता है। विकास और अनुकूलन की दृष्टि से लैंगिक जनन अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।


11. मानव नर जनन तंत्र के प्रमुख अंगों के नाम लिखिए।

उत्तर:
मानव नर जनन तंत्र के प्रमुख अंग वृषण, शुक्रवाहिका, वीर्यकोष, प्रोस्टेट ग्रंथि, मूत्रमार्ग तथा लिंग हैं। वृषण शुक्राणुओं और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण करते हैं। शुक्रवाहिका शुक्राणुओं को संग्रहित और परिवहन करती है। वीर्यकोष और प्रोस्टेट ग्रंथि ऐसे द्रव बनाती हैं जो शुक्राणुओं को पोषण और सुरक्षा प्रदान करते हैं। मूत्रमार्ग के माध्यम से वीर्य शरीर से बाहर निकलता है। लिंग मैथुन में सहायता करता है। ये सभी अंग मिलकर नर प्रजनन प्रणाली का निर्माण करते हैं और सफल जनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


12. मानव मादा जनन तंत्र के प्रमुख अंगों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
मानव मादा जनन तंत्र में अंडाशय, अंडवाहिनी (फैलोपियन नलिका), गर्भाशय तथा योनि प्रमुख अंग हैं। अंडाशय में अंडाणु तथा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बनते हैं। अंडवाहिनी में निषेचन की प्रक्रिया होती है। गर्भाशय वह स्थान है जहाँ भ्रूण का विकास होता है। गर्भाशय की भीतरी परत भ्रूण को पोषण प्रदान करती है। योनि जन्म मार्ग का कार्य करती है तथा यौन संबंधों में भाग लेती है। इन सभी अंगों के समन्वित कार्य से मानव प्रजनन और भ्रूण विकास संभव होता है।


13. यौवनावस्था में होने वाले प्रमुख परिवर्तन लिखिए।

उत्तर:
यौवनावस्था वह अवस्था है जिसमें बालक और बालिका प्रजनन योग्य बन जाते हैं। इस समय शरीर में अनेक शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं। लड़कों में दाढ़ी-मूँछ आना, आवाज का भारी होना, कंधों का चौड़ा होना तथा जनन अंगों का विकास होता है। लड़कियों में स्तनों का विकास, मासिक धर्म का प्रारंभ तथा कूल्हों का चौड़ा होना प्रमुख परिवर्तन हैं। दोनों में ऊँचाई और वजन बढ़ता है तथा हार्मोनल परिवर्तन होते हैं। ये परिवर्तन शरीर को प्रजनन के लिए तैयार करते हैं और वयस्कता की ओर ले जाते हैं।


14. निषेचन (Fertilization) क्या है?

उत्तर:
निषेचन वह प्रक्रिया है जिसमें नर युग्मक (शुक्राणु) और मादा युग्मक (अंडाणु) मिलकर युग्मनज का निर्माण करते हैं। मनुष्य में यह प्रक्रिया सामान्यतः अंडवाहिनी में होती है। निषेचन के समय दोनों युग्मकों की आनुवंशिक सामग्री मिल जाती है, जिससे नई संतति के गुण निर्धारित होते हैं। युग्मनज लगातार विभाजित होकर भ्रूण में विकसित होता है। निषेचन लैंगिक जनन का सबसे महत्वपूर्ण चरण है क्योंकि इसी से नए जीवन की शुरुआत होती है। यह प्रक्रिया प्रजाति की निरंतरता और आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में सहायक है।


15. भ्रूण (Embryo) और गर्भस्थ शिशु (Foetus) में अंतर बताइए।

उत्तर:
निषेचन के बाद बनने वाला युग्मनज लगातार विभाजित होकर प्रारंभिक विकास अवस्था में भ्रूण कहलाता है। इस अवस्था में शरीर के विभिन्न अंगों का निर्माण प्रारंभ होता है। जब भ्रूण के प्रमुख अंग विकसित हो जाते हैं और उसका आकार स्पष्ट दिखाई देने लगता है, तब उसे गर्भस्थ शिशु या फोएटस कहा जाता है। भ्रूण विकास की प्रारंभिक अवस्था है, जबकि फोएटस अपेक्षाकृत विकसित अवस्था होती है। गर्भाशय में फोएटस का विकास जन्म तक जारी रहता है। दोनों अवस्थाएँ मानव विकास की महत्वपूर्ण कड़ियाँ हैं।


16. प्लेसेंटा क्या है और इसका कार्य क्या है?

उत्तर:
प्लेसेंटा एक विशेष संरचना है जो गर्भावस्था के दौरान माँ और भ्रूण के बीच विकसित होती है। यह गर्भाशय की दीवार से जुड़ी होती है और नाल के माध्यम से भ्रूण से संबंधित रहती है। प्लेसेंटा का मुख्य कार्य भ्रूण को ऑक्सीजन, पोषक पदार्थ तथा आवश्यक हार्मोन उपलब्ध कराना है। साथ ही यह भ्रूण द्वारा उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड और अपशिष्ट पदार्थों को माँ के रक्त में भेजता है। इस प्रकार प्लेसेंटा माँ और भ्रूण के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम है।


17. मासिक धर्म (Menstruation) क्या है?

उत्तर:
मासिक धर्म मादा प्रजनन तंत्र में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यदि निषेचन नहीं होता, तो गर्भाशय की मोटी भीतरी परत टूटकर रक्त और ऊतकों के रूप में शरीर से बाहर निकल जाती है। इसे मासिक धर्म कहते हैं। यह प्रक्रिया सामान्यतः 28 दिनों के अंतराल पर होती है और 3 से 5 दिनों तक चल सकती है। मासिक धर्म किशोरावस्था में प्रारंभ होता है और रजोनिवृत्ति तक जारी रहता है। यह संकेत देता है कि मादा का प्रजनन तंत्र सक्रिय और स्वस्थ है।


18. गर्भनिरोधक उपायों की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर:
गर्भनिरोधक उपाय अनचाहे गर्भधारण को रोकने तथा परिवार नियोजन में सहायता करते हैं। ये जनसंख्या नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ गर्भनिरोधक उपाय यौन संचारित रोगों, जैसे एचआईवी/एड्स, से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं। गर्भनिरोधक साधनों में कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियाँ, कॉपर-टी तथा शल्य विधियाँ शामिल हैं। इनके उपयोग से माता और बच्चे के स्वास्थ्य की रक्षा होती है तथा परिवार अपनी आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार बच्चों की संख्या निर्धारित कर सकता है। इसलिए आधुनिक समाज में गर्भनिरोधक उपाय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।


19. कंडोम को प्रभावी गर्भनिरोधक क्यों माना जाता है?

उत्तर:
कंडोम एक सरल, सुरक्षित और सस्ता गर्भनिरोधक साधन है। यह नर द्वारा उपयोग किया जाता है और शुक्राणुओं को मादा जनन तंत्र में प्रवेश करने से रोकता है। इससे निषेचन नहीं हो पाता और गर्भधारण रुक जाता है। कंडोम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह यौन संचारित रोगों, विशेषकर एचआईवी/एड्स, से सुरक्षा प्रदान करता है। इसका उपयोग आसान है और इसके कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होते। परिवार नियोजन कार्यक्रमों में कंडोम को सबसे प्रभावी और लोकप्रिय गर्भनिरोधक साधनों में गिना जाता है।


20. लैंगिक जनन से विविधताएँ कैसे उत्पन्न होती हैं?

उत्तर:
लैंगिक जनन में दो अलग-अलग जनकों के युग्मक मिलते हैं। प्रत्येक युग्मक में आनुवंशिक जानकारी का आधा भाग होता है। निषेचन के समय दोनों जनकों के गुण मिलकर नई आनुवंशिक संरचना बनाते हैं। परिणामस्वरूप उत्पन्न संतति अपने माता-पिता से मिलती-जुलती होने के बावजूद उनसे पूरी तरह समान नहीं होती। यही अंतर विविधता कहलाता है। विविधताएँ जीवों को बदलते वातावरण में अनुकूलन करने, रोगों से लड़ने और विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायता करती हैं। इसलिए लैंगिक जनन जैविक विकास और प्रजातियों की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।