CBSE कक्षा 10 विज्ञान (जीव विज्ञान)

अध्याय 2 – नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination)

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

अध्याय में तंत्रिका तंत्र, हार्मोन, प्रतिवर्त क्रिया, मस्तिष्क तथा पादप हार्मोन प्रमुख विषय हैं।


1. नियंत्रण एवं समन्वय से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:
नियंत्रण एवं समन्वय वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने शरीर की विभिन्न गतिविधियों को व्यवस्थित करता है तथा वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार उचित प्रतिक्रिया देता है। मनुष्यों एवं अन्य जन्तुओं में यह कार्य मुख्यतः तंत्रिका तंत्र तथा अंतःस्रावी तंत्र द्वारा किया जाता है। तंत्रिका तंत्र विद्युत आवेगों के माध्यम से तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है, जबकि अंतःस्रावी तंत्र हार्मोनों के माध्यम से दीर्घकालिक नियंत्रण प्रदान करता है। नियंत्रण एवं समन्वय के कारण शरीर के सभी अंग एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर कार्य करते हैं, जिससे जीव का जीवन सुचारु रूप से चलता है और वह विभिन्न परिस्थितियों में स्वयं को अनुकूलित कर पाता है।


2. न्यूरॉन की संरचना एवं कार्य का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। यह तीन मुख्य भागों से मिलकर बना होता है—डेंड्राइट, कोशिका काय (साइटोन) तथा अक्षतंतु (ऐक्सॉन)। डेंड्राइट बाहरी सूचनाओं को ग्रहण करते हैं और उन्हें कोशिका काय तक पहुँचाते हैं। कोशिका काय में केंद्रक उपस्थित होता है, जो कोशिका की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। ऐक्सॉन तंत्रिका आवेगों को अन्य न्यूरॉनों या प्रभावी अंगों तक पहुँचाता है। न्यूरॉन विद्युत संकेतों के रूप में संदेशों का संचार करता है, जिससे शरीर विभिन्न उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रिया दे पाता है। यही कारण है कि न्यूरॉन शरीर में नियंत्रण एवं समन्वय का प्रमुख माध्यम माना जाता है।


3. प्रतिवर्त क्रिया (Reflex Action) क्या है?

उत्तर:
प्रतिवर्त क्रिया वह त्वरित, स्वतः एवं अनैच्छिक प्रतिक्रिया है जो किसी उद्दीपन के प्रति बिना सोचे-समझे होती है। उदाहरण के लिए, गर्म वस्तु को छूते ही हाथ का तुरंत पीछे हट जाना प्रतिवर्त क्रिया है। इसमें मस्तिष्क के विचार करने की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए प्रतिक्रिया बहुत तेज होती है। प्रतिवर्त क्रिया मुख्यतः मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है। यह जीव को संभावित हानि से बचाने में सहायक होती है। प्रतिवर्त क्रियाएँ जन्मजात होती हैं तथा शरीर की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनके कारण जीव अचानक उत्पन्न खतरों के प्रति तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है और चोट लगने की संभावना कम हो जाती है।


4. प्रतिवर्त चाप (Reflex Arc) क्या है?

उत्तर:
प्रतिवर्त चाप वह मार्ग है जिसके माध्यम से प्रतिवर्त क्रिया संपन्न होती है। इसमें उद्दीपन पहले ग्राही (रिसेप्टर) द्वारा ग्रहण किया जाता है। इसके बाद संवेदी तंत्रिका आवेग को मेरुरज्जु तक पहुँचाती है। मेरुरज्जु में स्थित मध्यवर्ती न्यूरॉन सूचना का विश्लेषण करता है और आदेश को प्रेरक तंत्रिका तक भेजता है। प्रेरक तंत्रिका प्रभावी अंग, जैसे मांसपेशी या ग्रंथि, तक संदेश पहुँचाती है जिससे प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है। प्रतिवर्त चाप के कारण प्रतिक्रिया बहुत तेजी से होती है क्योंकि इसमें मस्तिष्क की प्रत्यक्ष भागीदारी आवश्यक नहीं होती। यह शरीर की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है।


5. मानव मस्तिष्क के प्रमुख भागों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
मानव मस्तिष्क मुख्यतः तीन भागों में विभाजित होता है—अग्र मस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क तथा पश्च मस्तिष्क। अग्र मस्तिष्क सोचने, स्मृति, निर्णय लेने तथा ऐच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। मध्य मस्तिष्क आँखों एवं कानों से संबंधित कुछ प्रतिवर्त क्रियाओं का नियंत्रण करता है। पश्च मस्तिष्क में अनुमस्तिष्क, मेडुला तथा पोंस शामिल होते हैं। अनुमस्तिष्क शरीर के संतुलन एवं मांसपेशियों के समन्वय को नियंत्रित करता है। मेडुला श्वसन, हृदयगति तथा रक्तचाप जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करती है। इस प्रकार मस्तिष्क शरीर की लगभग सभी गतिविधियों का नियंत्रण एवं समन्वय करता है।


6. अग्र मस्तिष्क के कार्य लिखिए।

उत्तर:
अग्र मस्तिष्क मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा एवं विकसित भाग है। यह सोचने, तर्क करने, स्मृति, सीखने तथा निर्णय लेने जैसी उच्च मानसिक क्रियाओं का केंद्र है। यह शरीर के विभिन्न संवेदन अंगों से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है और उनके आधार पर उचित प्रतिक्रिया निर्धारित करता है। अग्र मस्तिष्क ऐच्छिक गतिविधियों जैसे लिखना, बोलना, चलना तथा पढ़ना आदि को भी नियंत्रित करता है। इसके अतिरिक्त यह भावनाओं तथा व्यवहार के नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मनुष्य की बुद्धिमत्ता और विवेक का मुख्य आधार अग्र मस्तिष्क ही है।


7. अनुमस्तिष्क (Cerebellum) के कार्य बताइए।

उत्तर:
अनुमस्तिष्क पश्च मस्तिष्क का एक महत्वपूर्ण भाग है जो शरीर के संतुलन एवं समन्वय का कार्य करता है। यह मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करता है तथा शरीर की मुद्रा बनाए रखने में सहायता करता है। चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना और खेलकूद जैसी गतिविधियों में अनुमस्तिष्क की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह विभिन्न मांसपेशियों के बीच समन्वय स्थापित करके शरीर की गतियों को सुचारु बनाता है। यदि अनुमस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो जाए तो व्यक्ति का संतुलन बिगड़ सकता है तथा उसकी गतिविधियाँ असामान्य हो सकती हैं। इसलिए यह शरीर की नियंत्रित एवं संतुलित गतियों के लिए आवश्यक है।


8. हार्मोन क्या हैं?

उत्तर:
हार्मोन ऐसे रासायनिक संदेशवाहक पदार्थ हैं जो अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा निर्मित किए जाते हैं। ये सीधे रक्त में स्रावित होकर शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचते हैं और उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। हार्मोन वृद्धि, विकास, प्रजनन, चयापचय तथा भावनात्मक प्रतिक्रियाओं जैसी अनेक प्रक्रियाओं का नियंत्रण करते हैं। प्रत्येक हार्मोन का एक विशिष्ट कार्य होता है और यह विशेष लक्ष्य अंगों पर प्रभाव डालता है। हार्मोन का संतुलित स्राव शरीर के सामान्य कार्यों के लिए आवश्यक है। इनके असंतुलन से विभिन्न रोग एवं विकार उत्पन्न हो सकते हैं।


9. अंतःस्रावी ग्रंथियाँ क्या हैं?

उत्तर:
अंतःस्रावी ग्रंथियाँ वे ग्रंथियाँ हैं जिनमें नलिकाएँ नहीं होतीं और जो अपने स्राव सीधे रक्त में छोड़ती हैं। इनके द्वारा स्रावित रासायनिक पदार्थों को हार्मोन कहा जाता है। प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियों में पीयूष ग्रंथि, थायरॉइड ग्रंथि, अधिवृक्क ग्रंथि तथा अग्न्याशय शामिल हैं। ये ग्रंथियाँ शरीर की वृद्धि, विकास, ऊर्जा उत्पादन तथा अन्य जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करती हैं। हार्मोन रक्त के माध्यम से लक्ष्य अंगों तक पहुँचकर अपना प्रभाव दिखाते हैं। शरीर की विभिन्न क्रियाओं के दीर्घकालिक नियंत्रण में अंतःस्रावी तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


10. थायरॉक्सिन हार्मोन का महत्व बताइए।

उत्तर:
थायरॉक्सिन हार्मोन थायरॉइड ग्रंथि द्वारा स्रावित किया जाता है। इसके निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक होता है। यह शरीर की चयापचय दर को नियंत्रित करता है तथा भोजन से प्राप्त ऊर्जा के उपयोग में सहायता करता है। थायरॉक्सिन शरीर की वृद्धि एवं विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि शरीर में आयोडीन की कमी हो जाए तो थायरॉक्सिन का निर्माण कम हो जाता है, जिससे गलगंड (घेंघा) रोग हो सकता है। इसलिए संतुलित आहार में आयोडीन युक्त नमक का सेवन आवश्यक माना जाता है। यह हार्मोन शरीर के सामान्य स्वास्थ्य एवं विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


11. एड्रेनालिन हार्मोन का कार्य क्या है?

उत्तर:
एड्रेनालिन हार्मोन अधिवृक्क ग्रंथियों द्वारा स्रावित किया जाता है। इसे आपातकालीन हार्मोन भी कहा जाता है क्योंकि यह भय, क्रोध, तनाव या उत्तेजना की स्थिति में अधिक मात्रा में स्रावित होता है। यह हृदयगति को बढ़ाता है, रक्तचाप में वृद्धि करता है तथा मांसपेशियों को अधिक ऊर्जा उपलब्ध कराता है। इसके प्रभाव से शरीर खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार हो जाता है। एड्रेनालिन फेफड़ों में ऑक्सीजन की आपूर्ति भी बढ़ाता है। इस प्रकार यह शरीर को ‘लड़ो या भागो’ (Fight or Flight) प्रतिक्रिया के लिए सक्षम बनाता है।


12. पौधों में समन्वय कैसे होता है?

उत्तर:
पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, इसलिए उनमें समन्वय हार्मोनों के माध्यम से होता है। पौधों द्वारा उत्पन्न रासायनिक पदार्थों को पादप हार्मोन कहा जाता है। ये हार्मोन वृद्धि, विकास, फूल बनने, फल पकने तथा विभिन्न उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए, ऑक्सिन प्रकाश की दिशा में वृद्धि कराने में सहायता करता है। पौधों में समन्वय की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी होती है क्योंकि इसमें रासायनिक संदेशवाहकों का उपयोग होता है। फिर भी यह पौधों को पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति अनुकूल प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती है।


13. ऑक्सिन हार्मोन के कार्य लिखिए।

उत्तर:
ऑक्सिन पौधों में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण वृद्धि हार्मोन है। यह मुख्यतः तनों एवं नई पत्तियों के शीर्ष भागों में बनता है। ऑक्सिन कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाकर पौधों की वृद्धि में सहायता करता है। यह प्रकाशानुवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसके कारण पौधे प्रकाश की दिशा में मुड़ते हैं। ऑक्सिन जड़ों के विकास को भी प्रभावित करता है तथा फल बनने की प्रक्रिया में सहायक होता है। पौधों की वृद्धि एवं दिशा निर्धारण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए इसे पौधों के प्रमुख वृद्धि हार्मोनों में गिना जाता है।


14. प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) क्या है?

उत्तर:
प्रकाशानुवर्तन पौधों की वह वृद्धि प्रतिक्रिया है जिसमें वे प्रकाश की दिशा के अनुसार बढ़ते हैं। तनों में सामान्यतः धनात्मक प्रकाशानुवर्तन पाया जाता है, अर्थात वे प्रकाश की ओर बढ़ते हैं। जब प्रकाश एक दिशा से पड़ता है, तब ऑक्सिन हार्मोन छायादार भाग में अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाता है। इससे उस भाग की कोशिकाएँ अधिक लंबी हो जाती हैं और तना प्रकाश की ओर मुड़ जाता है। यह प्रक्रिया पौधों को प्रकाश प्राप्त करने में सहायता करती है, जिससे प्रकाश संश्लेषण प्रभावी ढंग से हो पाता है।


15. गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) क्या है?

उत्तर:
गुरुत्वानुवर्तन पौधों की वृद्धि की वह प्रतिक्रिया है जो गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में होती है। जड़ें सामान्यतः धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन प्रदर्शित करती हैं क्योंकि वे पृथ्वी की ओर बढ़ती हैं। इसके विपरीत तने ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन दिखाते हैं क्योंकि वे गुरुत्वाकर्षण के विपरीत दिशा में बढ़ते हैं। यह प्रतिक्रिया पौधों को उचित दिशा में वृद्धि करने में सहायता करती है। गुरुत्वानुवर्तन के कारण जड़ें मिट्टी से जल एवं खनिज प्राप्त कर पाती हैं, जबकि तने सूर्य के प्रकाश तक पहुँचकर प्रकाश संश्लेषण कर सकते हैं।


16. साइटोकाइनिन के कार्य बताइए।

उत्तर:
साइटोकाइनिन एक महत्वपूर्ण पादप हार्मोन है जो कोशिका विभाजन को प्रोत्साहित करता है। यह नई कोशिकाओं के निर्माण में सहायता करता है और पौधों की वृद्धि एवं विकास को बढ़ावा देता है। साइटोकाइनिन पत्तियों को लंबे समय तक हरा बनाए रखने में भी सहायक होता है तथा वृद्धावस्था की प्रक्रिया को धीमा करता है। यह जड़ों एवं तनों की वृद्धि के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कृषि में इसका उपयोग पौधों की वृद्धि बढ़ाने तथा ऊतक संवर्धन तकनीकों में भी किया जाता है।


17. जिबरेलिन हार्मोन का महत्व बताइए।

उत्तर:
जिबरेलिन पौधों का एक वृद्धि हार्मोन है जो विशेष रूप से तनों की लंबाई बढ़ाने में सहायता करता है। यह बीजों के अंकुरण को प्रोत्साहित करता है तथा पौधों की समग्र वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिबरेलिन के प्रभाव से पौधे अधिक ऊँचे एवं स्वस्थ बनते हैं। यह फूल आने तथा फलों के विकास में भी सहायक होता है। कृषि क्षेत्र में जिबरेलिन का उपयोग फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसलिए यह पौधों की वृद्धि एवं विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हार्मोन माना जाता है।


18. एब्सिसिक अम्ल (ABA) क्या है?

उत्तर:
एब्सिसिक अम्ल एक वृद्धि-निरोधक पादप हार्मोन है। इसका मुख्य कार्य पौधों की वृद्धि को नियंत्रित करना तथा प्रतिकूल परिस्थितियों में उनकी रक्षा करना है। यह पत्तियों के झड़ने, बीजों की सुप्तावस्था तथा रंध्रों के बंद होने में सहायता करता है। जल की कमी होने पर ABA रंध्रों को बंद कर देता है, जिससे वाष्पोत्सर्जन कम होता है और जल की बचत होती है। इस प्रकार यह पौधों को सूखे जैसी परिस्थितियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


19. तंत्रिका तंत्र और हार्मोन तंत्र में अंतर लिखिए।

उत्तर:
तंत्रिका तंत्र तथा हार्मोन तंत्र दोनों शरीर के नियंत्रण एवं समन्वय में सहायता करते हैं, लेकिन इनके कार्य करने का तरीका भिन्न होता है। तंत्रिका तंत्र विद्युत आवेगों के माध्यम से कार्य करता है और इसकी प्रतिक्रिया बहुत तेज होती है। दूसरी ओर हार्मोन तंत्र रासायनिक संदेशवाहकों के माध्यम से कार्य करता है तथा इसकी प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत धीमी होती है। तंत्रिका तंत्र का प्रभाव अल्पकालिक होता है, जबकि हार्मोन तंत्र का प्रभाव अधिक समय तक बना रह सकता है। दोनों तंत्र मिलकर शरीर की विभिन्न गतिविधियों का समन्वय करते हैं।


20. नियंत्रण एवं समन्वय जीवों के लिए क्यों आवश्यक है?

उत्तर:
नियंत्रण एवं समन्वय जीवों के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके माध्यम से जीव अपने वातावरण में होने वाले परिवर्तनों को पहचानते हैं और उनके अनुसार प्रतिक्रिया देते हैं। यह शरीर के विभिन्न अंगों एवं प्रणालियों के बीच तालमेल स्थापित करता है, जिससे सभी क्रियाएँ सुचारु रूप से संपन्न होती हैं। नियंत्रण एवं समन्वय के अभाव में शरीर की गतिविधियाँ असंगठित हो जाएँगी तथा जीव उचित प्रतिक्रिया नहीं दे पाएगा। यह वृद्धि, विकास, प्रजनन तथा सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को भी नियंत्रित करता है। इसलिए जीवित रहने और अनुकूलन के लिए नियंत्रण एवं समन्वय अनिवार्य है।