CBSE कक्षा 10 विज्ञान (भौतिक विज्ञान)

अध्याय 1 – प्रकाश : परावर्तन एवं अपवर्तन

20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

यह अध्याय प्रकाश के परावर्तन, गोलाकार दर्पणों, अपवर्तन, लेंसों तथा उनसे बनने वाले प्रतिबिंबों से संबंधित है। CBSE पाठ्यक्रम में परावर्तन के नियम, दर्पण सूत्र, लेंस सूत्र, आवर्धन तथा अपवर्तनांक प्रमुख विषय हैं।


1. प्रकाश का परावर्तन क्या है? इसके नियम लिखिए।

उत्तर:
जब प्रकाश किसी चमकदार सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटता है, तो इस घटना को परावर्तन कहते हैं। परावर्तन के दो मुख्य नियम हैं। पहला, आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है। दूसरा, आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलंब एक ही तल में स्थित होते हैं। ये नियम समतल तथा गोलाकार दोनों प्रकार के दर्पणों पर लागू होते हैं। परावर्तन के कारण ही हम दर्पण में अपनी छवि देख पाते हैं। वाहन के शीशे, पेरिस्कोप तथा अन्य प्रकाशीय यंत्र भी इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।


2. अवतल दर्पण क्या है? इसके दो उपयोग लिखिए।

उत्तर:
अवतल दर्पण वह गोलाकार दर्पण होता है जिसकी परावर्तक सतह अंदर की ओर मुड़ी होती है। यह समानांतर प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर एकत्रित कर सकता है, जिसे मुख्य फोकस कहते हैं। इसका उपयोग शेविंग दर्पण के रूप में किया जाता है क्योंकि यह बड़ा और स्पष्ट प्रतिबिंब बनाता है। वाहन की हेडलाइटों तथा टॉर्च में भी अवतल दर्पण लगाए जाते हैं ताकि प्रकाश किरणें समानांतर रूप में आगे बढ़ सकें। इसके अतिरिक्त सौर भट्टियों में सूर्य के प्रकाश को केंद्रित करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।


3. उत्तल दर्पण की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:
उत्तल दर्पण की परावर्तक सतह बाहर की ओर उभरी होती है। यह सदैव आभासी, सीधा तथा वस्तु से छोटा प्रतिबिंब बनाता है। इसका दृष्टिक्षेत्र बहुत बड़ा होता है, इसलिए चालक को पीछे का अधिक क्षेत्र दिखाई देता है। यही कारण है कि इसका उपयोग वाहनों के रियर-व्यू मिरर के रूप में किया जाता है। उत्तल दर्पण में बना प्रतिबिंब स्क्रीन पर प्राप्त नहीं किया जा सकता क्योंकि वह आभासी होता है। इसकी यह विशेषता सड़क सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


4. मुख्य फोकस और फोकस दूरी में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
मुख्य फोकस वह बिंदु है जहाँ मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद मिलती हैं अथवा मिलती हुई प्रतीत होती हैं। फोकस दूरी दर्पण या लेंस के ध्रुव/प्रकाशीय केंद्र और मुख्य फोकस के बीच की दूरी होती है। इसे सामान्यतः ‘f’ से दर्शाया जाता है। फोकस दूरी किसी दर्पण या लेंस की शक्ति को निर्धारित करती है। कम फोकस दूरी वाला दर्पण या लेंस प्रकाश को अधिक मोड़ता है जबकि अधिक फोकस दूरी वाला कम मोड़ता है।


5. दर्पण सूत्र क्या है? इसका महत्व बताइए।

उत्तर:
गोलाकार दर्पणों के लिए दर्पण सूत्र है:

[\frac{1}{f}=\frac{1}{v}+\frac{1}{u}]

जहाँ f फोकस दूरी, v प्रतिबिंब दूरी तथा u वस्तु दूरी है। यह सूत्र वस्तु, प्रतिबिंब तथा फोकस दूरी के बीच संबंध स्थापित करता है। इसकी सहायता से प्रतिबिंब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात की जा सकती है। प्रश्नों में संख्यात्मक हल निकालने के लिए यह सूत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है। CBSE बोर्ड परीक्षाओं में दर्पण सूत्र पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।


6. आवर्धन (Magnification) क्या है?

उत्तर:
आवर्धन किसी प्रतिबिंब के आकार और वस्तु के आकार के अनुपात को कहते हैं। दर्पणों के लिए इसका सूत्र है:

[m=\frac{h_i}{h_o}=-\frac{v}{u}]

जहाँ (h_i) प्रतिबिंब की ऊँचाई तथा (h_o) वस्तु की ऊँचाई है। यदि आवर्धन धनात्मक हो तो प्रतिबिंब सीधा और आभासी होता है। यदि आवर्धन ऋणात्मक हो तो प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा होता है। आवर्धन से यह पता चलता है कि प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा है, छोटा है या समान आकार का है।


7. प्रकाश का अपवर्तन क्या है?

उत्तर:
जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है, तो उसकी चाल बदल जाती है और उसका मार्ग मुड़ जाता है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं। यदि प्रकाश विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाता है तो वह अभिलंब की ओर मुड़ता है। इसके विपरीत सघन से विरल माध्यम में जाने पर अभिलंब से दूर मुड़ता है। पानी में रखी हुई पेंसिल का मुड़ी हुई दिखाई देना अपवर्तन का सामान्य उदाहरण है।


8. अपवर्तन के नियम लिखिए।

उत्तर:
अपवर्तन के दो मुख्य नियम हैं। पहला, आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में स्थित होते हैं। दूसरा, किसी निश्चित माध्यम युग्म के लिए आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात स्थिर रहता है। इसे स्नेल का नियम कहते हैं। यह स्थिरांक दोनों माध्यमों के अपवर्तनांक पर निर्भर करता है। इन नियमों की सहायता से प्रकाश के मार्ग का अध्ययन किया जाता है तथा लेंसों और अन्य प्रकाशीय यंत्रों की कार्यप्रणाली समझी जाती है।


9. अपवर्तनांक क्या है?

उत्तर:
किसी माध्यम में प्रकाश की चाल की तुलना निर्वात में प्रकाश की चाल से करने पर जो अनुपात प्राप्त होता है, उसे उस माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं। इसे सामान्यतः ‘n’ से दर्शाया जाता है।

[n=\frac{c}{v}]

जहाँ c निर्वात में प्रकाश की चाल तथा v माध्यम में प्रकाश की चाल है। अधिक अपवर्तनांक वाले माध्यम में प्रकाश की चाल कम होती है। जल, काँच तथा हीरा विभिन्न अपवर्तनांकों वाले पदार्थ हैं। अपवर्तनांक किसी माध्यम के प्रकाशीय घनत्व को दर्शाता है।


10. उत्तल लेंस क्या है? इसके उपयोग बताइए।

उत्तर:
उत्तल लेंस बीच में मोटा और किनारों पर पतला होता है। इसे अभिसारी लेंस भी कहा जाता है क्योंकि यह समानांतर प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर एकत्रित करता है। इसका उपयोग कैमरों, सूक्ष्मदर्शियों, दूरबीनों तथा दृष्टिदोष सुधारने वाले चश्मों में किया जाता है। यह वास्तविक तथा आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है। वस्तु की स्थिति के अनुसार प्रतिबिंब का आकार और प्रकृति बदलती रहती है।


11. अवतल लेंस क्या है?

उत्तर:
अवतल लेंस बीच में पतला तथा किनारों पर मोटा होता है। इसे अपसारी लेंस कहा जाता है क्योंकि यह प्रकाश किरणों को फैलाता है। यह सदैव आभासी, सीधा तथा वस्तु से छोटा प्रतिबिंब बनाता है। निकट दृष्टिदोष (मायोपिया) के उपचार में अवतल लेंस का उपयोग किया जाता है। इसका मुख्य फोकस आभासी होता है क्योंकि प्रकाश किरणें वास्तव में नहीं मिलतीं बल्कि मिलती हुई प्रतीत होती हैं।


12. लेंस सूत्र लिखिए और इसका महत्व बताइए।

उत्तर:
गोलाकार लेंसों के लिए लेंस सूत्र है:

[\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}]

यह सूत्र वस्तु दूरी, प्रतिबिंब दूरी तथा फोकस दूरी के बीच संबंध स्थापित करता है। इसकी सहायता से प्रतिबिंब की स्थिति और प्रकृति ज्ञात की जाती है। भौतिकी में लेंस आधारित संख्यात्मक प्रश्नों को हल करने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण सूत्र है। कैमरा, दूरबीन और सूक्ष्मदर्शी जैसे उपकरणों के अध्ययन में भी इसका उपयोग किया जाता है।


13. लेंस की शक्ति क्या है?

उत्तर:
लेंस की शक्ति प्रकाश किरणों को अभिसारित या अपसारित करने की क्षमता को दर्शाती है। इसे P से व्यक्त करते हैं।

[P=\frac{1}{f}]

जहाँ f फोकस दूरी मीटर में होती है। इसकी इकाई डायोप्टर (D) है। उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक तथा अवतल लेंस की शक्ति ऋणात्मक होती है। कम फोकस दूरी वाले लेंस की शक्ति अधिक होती है। चश्मों में प्रयुक्त लेंसों की शक्ति डायोप्टर में लिखी जाती है।


14. वास्तविक और आभासी प्रतिबिंब में अंतर लिखिए।

उत्तर:
वास्तविक प्रतिबिंब तब बनता है जब प्रकाश किरणें वास्तव में किसी बिंदु पर मिलती हैं। इसे स्क्रीन पर प्राप्त किया जा सकता है और यह सामान्यतः उल्टा होता है। दूसरी ओर, आभासी प्रतिबिंब तब बनता है जब किरणें किसी बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं। इसे स्क्रीन पर प्राप्त नहीं किया जा सकता तथा यह सीधा होता है। अवतल दर्पण दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है, जबकि उत्तल दर्पण केवल आभासी प्रतिबिंब बनाता है।


15. गोलाकार दर्पणों के लिए संकेत परिपाटी क्या है?

उत्तर:
न्यू कार्टेशियन संकेत परिपाटी के अनुसार सभी दूरियाँ ध्रुव से मापी जाती हैं। मुख्य अक्ष पर प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरियाँ धनात्मक तथा विपरीत दिशा में मापी गई दूरियाँ ऋणात्मक मानी जाती हैं। मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाइयाँ धनात्मक तथा नीचे की ऊँचाइयाँ ऋणात्मक होती हैं। इस संकेत परिपाटी का उपयोग दर्पण सूत्र और संख्यात्मक प्रश्नों के समाधान में किया जाता है। सही संकेतों का प्रयोग उत्तर की शुद्धता के लिए आवश्यक है।


16. प्रकाश की चाल विभिन्न माध्यमों में क्यों बदलती है?

उत्तर:
प्रकाश की चाल किसी माध्यम के प्रकाशीय घनत्व पर निर्भर करती है। निर्वात में इसकी चाल अधिकतम (3 \times 10^8) मीटर प्रति सेकंड होती है। जब प्रकाश जल, काँच या अन्य माध्यमों में प्रवेश करता है, तो माध्यम के कणों के साथ उसकी अंतःक्रिया के कारण उसकी चाल कम हो जाती है। इसी चाल परिवर्तन के कारण अपवर्तन की घटना घटित होती है। जितना अधिक अपवर्तनांक होगा, माध्यम में प्रकाश की चाल उतनी ही कम होगी।


17. अवतल दर्पण कब बड़ा प्रतिबिंब बनाता है?

उत्तर:
जब वस्तु अवतल दर्पण के फोकस और ध्रुव के बीच रखी जाती है, तब दर्पण एक बड़ा, सीधा तथा आभासी प्रतिबिंब बनाता है। यही कारण है कि शेविंग दर्पण तथा मेकअप मिरर के रूप में अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है। इस स्थिति में प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनता हुआ प्रतीत होता है। बड़ा और स्पष्ट प्रतिबिंब देखने के लिए वस्तु को फोकस दूरी के भीतर रखना आवश्यक होता है।


18. उत्तल दर्पण वाहनों में क्यों उपयोग किया जाता है?

उत्तर:
उत्तल दर्पण का दृष्टिक्षेत्र बहुत बड़ा होता है। यह पीछे के बड़े क्षेत्र का दृश्य चालक को दिखाता है। इसके द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव सीधा, छोटा तथा आभासी होता है। सड़क पर वाहन चलाते समय चालक को अधिक क्षेत्र दिखाई देने से दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है। इसी कारण कारों, बसों तथा अन्य वाहनों में रियर-व्यू मिरर के रूप में उत्तल दर्पण का उपयोग किया जाता है।


19. अभिसारी और अपसारी लेंस में अंतर बताइए।

उत्तर:
अभिसारी लेंस अर्थात् उत्तल लेंस समानांतर प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर एकत्रित करता है। इसके विपरीत अपसारी लेंस अर्थात् अवतल लेंस प्रकाश किरणों को फैलाता है। उत्तल लेंस वास्तविक तथा आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है, जबकि अवतल लेंस केवल आभासी प्रतिबिंब बनाता है। उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक तथा अवतल लेंस की शक्ति ऋणात्मक होती है। दोनों लेंसों का उपयोग विभिन्न प्रकाशीय उपकरणों में किया जाता है।


20. इस अध्याय में किरण आरेखों का महत्व क्या है?

उत्तर:
किरण आरेख प्रकाश के परावर्तन और अपवर्तन को समझने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। इनके द्वारा दर्पणों और लेंसों में बनने वाले प्रतिबिंबों की स्थिति, आकार तथा प्रकृति ज्ञात की जाती है। CBSE परीक्षाओं में किरण आरेखों पर आधारित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। सही किरण आरेख बनाने के लिए परावर्तन और अपवर्तन के नियमों का ज्ञान आवश्यक है। इनका अभ्यास करने से संख्यात्मक प्रश्नों तथा अवधारणात्मक प्रश्नों को समझना आसान हो जाता है।